शक न हो इसलिए करता था मजदूरी
सूत्रों के अनुसार, अंकित सुबह आठ बजे सोकर उठता और नौ बजे से मोबाइल पकड़ लेता था। कभी फ्लैट के दरवाजे पर तो कभी सड़क पर आकर वह अपने लोकल कनेक्शन से दोपहर तीन बजे तक बातें किया करता था। किसी को शक न हो इसलिए अंकित बीच-बीच में मजदूरी करने भी चला जाता था। पड़ोसियों का कहना है कि अच्छा ही था कि हमेशा शांत दिखने वाले अंकित ने किसी को मोहल्ले में अपना साथी नहीं बनाया वरना न जाने कितने लड़के उसके चक्कर में फंस जाते।
मुंबई के महापौर कार्यालय को भी मिली थी धमकी
जांच में सामने आया कि 12 अक्तूबर को नोएडा के स्कूलों और अन्य स्थानों को धमकी भरे ईमेल भेजने में simenbriones9265@gmail.co m का इस्तेमाल किया गया था। वहीं, 23 अक्तूबर को मुंबई के महापौर कार्यालय को बम धमाके की धमकी देने के लिए smithjohnson6889@gmail.co m का इस्तेमाल हुआ था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन ईमेल खातों के पासवर्ड और अन्य जानकारियां व्हाट्सएप के जरिये अलामीन को भेजी गई थीं।
इन बिंदुओं की होनी है जांच
- अंकित ने गोविंदनगर की किस दुकान से लैपटॉप खरीदा था।
- अंकित के बैंक अकाउंट कानपुर के अलावा किन-किन शहरों में हैं। दहेली सुजानपुर में अंकित के साथी कौन-कौन हैं।
- बर्रा में किस दोस्त पर परिजन उंगली उठा रहे हैं।
- अंकित जब कभी कानपुर से बाहर नहीं गया, तो उसे ई-मेल बनाने का प्रशिक्षण किसने दिया।
- पाकिस्तान और बांग्लादेश से अंकित का कनेक्शन कराने वाला आका कौन है। किनसे उसकी चैट होती थी।
- अंकित 2021 से ई-मेल आईडी बना रहा था इस काम में मददगार कौन-कौन लोग थे।
गांव का खंडहरनुमा मकान देखने कभी नहीं गया अंकित
यूपी एटीएस की ओर से पकड़े गए अंकित संखवार का परिवार कई दशक पहले अपना पैतृक गांव सजेती थाने के अनोईया को छोड़कर कानपुर चला गया था। करीब 15 साल पहले आकर घर की पक्की दीवारें बनवाकर बिना छत डलवाए छोड़ दी थीं। तब ऐसे ही खड़ी हुई हैं। गांव में आठ बिस्वा जमीन में फसल कराने के लिए पिता का साल में एक दो बार आते हैं। गांव में रह रहे अंकित के पिता प्रहलाद के बड़े भाई मूलचंद्र के बेटे धर्मेंद्र ने बताया कि अंकित यहां कभी नहीं आया।
एटीएस के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। इसके अलावा आरोपी के कानपुर के और कौन-कौन कनेक्शन हो सकते हैं। इसके लिए संबंधित थानों को जांच के लिए कहा गया है। -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर
खरीदो और बेचो ग्रुप से जुड़े साइबर ठगों के तार
यूपी एटीएस के सूत्रों के अनुसार, अंकित अपने मोबाइल और लैपटॉप पर खरीदो और बेचो (बाय एंड सेल) नाम का व्हाट्सअप ग्रुप भी चलाता था। इसी के माध्यम से वह देश-विदेश में बैठे लोगों में से अपने ग्राहक भी तलाशता था। इन ग्राहकों में कुछ आतंकी तो कुछ साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड उससे जुड़ते थे और फर्जी ई-मेल आईडी व पासवर्ड खरीदते थे। कानपुर में साइबर ठगी के कई मामले पकड़े गए हैं।
साइबर ठगों के नेटवर्क का भी खुलासा होने की संभावना
इनमें सबसे बड़ी साइबर ठगी 5600 करोड़ तक की शामिल है। इनके मास्टरमाइंड राजवीर सिंह, सुल्तान मिर्जा, महफूज उर्फ पप्पू छुरी जैसे महाठग रहे हैं। कानपुर पुलिस अब एटीएस से संपर्क उस ग्रुप का डाटा मांगेगी, जिससे कि साइबर ठगों के नेटवर्क का भी खुलासा होने की संभावना है। पुलिस का मानना है कि दुबई और थाईलैंड से बैठकर साइबर ठगी करने वालों के नाम भी ग्रुप में मिल सकते हैं।