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यूपी: किस्तों वाले लैपटॉप से कमा रहा था डॉलर-क्रिप्टो, अंकित था आतंकियों का स्लीपर मॉड्यूल, सीपी ने कही ये बात

Fri, 30 Oct 2026 08:55 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: सेन पश्चिम पारा स्थित पीएम आवास से यूपी एटीएस द्वारा पकड़े गए अंकित शंखवार (24) की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। किस्तों पर पुराना लैपटॉप लेकर चलाने वाला अंकित किसी स्लीपर मॉड्यूल की तरह काम कर रहा था। रिक्शा चालक पिता के मुताबिक, उसे अंदाजा भी नहीं था कि अंकित डॉलर और 6000 क्रिप्टो करेंसी में कमाई कर रहा है।
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कानपुर में एटीएस की कार्रवाई - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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भोली सी सूरत, साधारण पहनावा और एक कमरे के फ्लैट में रहने वाले अंकित को देखकर किसी को नहीं लगता था कि वह आतंकियों से जुड़ा स्लीपर मॉड्यूल भी हो सकता है। इस बात का पता जब उसके घरवालों को चला, तो उनके पैरों से भी जमीन खिसक गई। रिक्शा चलाने वाले पिता प्रहलाद मानने को तैयार नहीं हैं कि किस्तों पर पुराना लैपटॉप खरीदकर उसे चलाने वाले अंकित की कमाई डॉलर और क्रिप्टो में हो रही थी।

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एटीएस को अंकित के एक अकाउंट में 6000 क्रिप्टो करेंसी भी मिली है। पिता ने बताया कि छह माह पहले ही अंकित ने गोविंदनगर से एक पुराना लैपटॉप किस्तों में खरीदा था, जिसे वह रात-रात भर चलाया करता था। यह किसी को नहीं पता कि वह वीडियो गेम खेल रहा था कि देश के साथ आतंकी खेल। कानपुर में अंकित की तरह पहले भी कई बार स्लीपर मॉड्यूल एटीएस और एसटीएफ के हत्थे चढ़ चुके हैं।

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शक न हो इसलिए करता था मजदूरी
सूत्रों के अनुसार, अंकित सुबह आठ बजे सोकर उठता और नौ बजे से मोबाइल पकड़ लेता था। कभी फ्लैट के दरवाजे पर तो कभी सड़क पर आकर वह अपने लोकल कनेक्शन से दोपहर तीन बजे तक बातें किया करता था। किसी को शक न हो इसलिए अंकित बीच-बीच में मजदूरी करने भी चला जाता था। पड़ोसियों का कहना है कि अच्छा ही था कि हमेशा शांत दिखने वाले अंकित ने किसी को मोहल्ले में अपना साथी नहीं बनाया वरना न जाने कितने लड़के उसके चक्कर में फंस जाते।

मुंबई के महापौर कार्यालय को भी मिली थी धमकी
जांच में सामने आया कि 12 अक्तूबर को नोएडा के स्कूलों और अन्य स्थानों को धमकी भरे ईमेल भेजने में simenbriones9265@gmail.co m का इस्तेमाल किया गया था। वहीं, 23 अक्तूबर को मुंबई के महापौर कार्यालय को बम धमाके की धमकी देने के लिए smithjohnson6889@gmail.co m का इस्तेमाल हुआ था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन ईमेल खातों के पासवर्ड और अन्य जानकारियां व्हाट्सएप के जरिये अलामीन को भेजी गई थीं।

इन बिंदुओं की होनी है जांच
  • अंकित ने गोविंदनगर की किस दुकान से लैपटॉप खरीदा था।
  • अंकित के बैंक अकाउंट कानपुर के अलावा किन-किन शहरों में हैं। दहेली सुजानपुर में अंकित के साथी कौन-कौन हैं।
  • बर्रा में किस दोस्त पर परिजन उंगली उठा रहे हैं।
  • अंकित जब कभी कानपुर से बाहर नहीं गया, तो उसे ई-मेल बनाने का प्रशिक्षण किसने दिया।
  • पाकिस्तान और बांग्लादेश से अंकित का कनेक्शन कराने वाला आका कौन है। किनसे उसकी चैट होती थी।
  • अंकित 2021 से ई-मेल आईडी बना रहा था इस काम में मददगार कौन-कौन लोग थे।

गांव का खंडहरनुमा मकान देखने कभी नहीं गया अंकित
यूपी एटीएस की ओर से पकड़े गए अंकित संखवार का परिवार कई दशक पहले अपना पैतृक गांव सजेती थाने के अनोईया को छोड़कर कानपुर चला गया था। करीब 15 साल पहले आकर घर की पक्की दीवारें बनवाकर बिना छत डलवाए छोड़ दी थीं। तब ऐसे ही खड़ी हुई हैं। गांव में आठ बिस्वा जमीन में फसल कराने के लिए पिता का साल में एक दो बार आते हैं। गांव में रह रहे अंकित के पिता प्रहलाद के बड़े भाई मूलचंद्र के बेटे धर्मेंद्र ने बताया कि अंकित यहां कभी नहीं आया।

एटीएस के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। इसके अलावा आरोपी के कानपुर के और कौन-कौन कनेक्शन हो सकते हैं। इसके लिए संबंधित थानों को जांच के लिए कहा गया है।  -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर

खरीदो और बेचो ग्रुप से जुड़े साइबर ठगों के तार
यूपी एटीएस के सूत्रों के अनुसार, अंकित अपने मोबाइल और लैपटॉप पर खरीदो और बेचो (बाय एंड सेल) नाम का व्हाट्सअप ग्रुप भी चलाता था। इसी के माध्यम से वह देश-विदेश में बैठे लोगों में से अपने ग्राहक भी तलाशता था। इन ग्राहकों में कुछ आतंकी तो कुछ साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड उससे जुड़ते थे और फर्जी ई-मेल आईडी व पासवर्ड खरीदते थे। कानपुर में साइबर ठगी के कई मामले पकड़े गए हैं।
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साइबर ठगों के नेटवर्क का भी खुलासा होने की संभावना
इनमें सबसे बड़ी साइबर ठगी 5600 करोड़ तक की शामिल है। इनके मास्टरमाइंड राजवीर सिंह, सुल्तान मिर्जा, महफूज उर्फ पप्पू छुरी जैसे महाठग रहे हैं। कानपुर पुलिस अब एटीएस से संपर्क उस ग्रुप का डाटा मांगेगी, जिससे कि साइबर ठगों के नेटवर्क का भी खुलासा होने की संभावना है। पुलिस का मानना है कि दुबई और थाईलैंड से बैठकर साइबर ठगी करने वालों के नाम भी ग्रुप में मिल सकते हैं।
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