अब 12 पर पहुंच गया है हीमोग्लोबिन
जिले के शिवराजपुर और चौबेपुर ब्लॉक के 10-10 गांवों में यह पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया। प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर प्रतीक तिवारी के अनुसार, इस अभियान के तहत 20 गांवों की 1,200 किशोरियों को गोद लिया गया है। इनमें 790 ज्यादा एनीमिक थीं। सभी का हीमोग्लोबिन 10 से कम था। अभी चार गांवों के 290 किशोरियों की रिपोर्ट आई है, जिसमें इनका हीमोग्लोबिन अब 12 पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य है कि हर वर्ष तीन प्रतिशत एनीमिया कम हो। उसके अनुसार रिपोर्ट ज्यादा बेहतर है।
किशोरियों को खानपान के प्रति जागरूक भी करते हैं
उन्होंने बताया कि दिसंबर तक सभी 20 गांवों की सभी किशोरियों की रिपोर्ट आ जाएगी। प्रोजेक्ट के तहत 85 गर्भवती महिलाओं को भी जागरूक किया जा रहा है। कानपुर ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा ने बताया कि किशोरियों में एनीमिया को दूर करने के लिए यह प्रोजेक्ट चलाया गया था। अब इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। हम लोग समय-समय पर जाकर किशोरियों को खानपान के प्रति जागरूक भी करते रहते हैं।
शक्तिवार और आयरन की मीठी गोली का जादू
बच्चों में दवा के प्रति अरुचि दूर करने के लिए प्रोजेक्ट के तहत दो बड़े व्यावहारिक बदलाव किए गए। स्कूलों में हर शनिवार को शक्तिवार के रूप में मनाया जाने लगा और आयरन-फोलिक एसिड की दवा को आयरन की मीठी गोली नाम दिया गया। पहले जिस दवा को किशोरियां फेंक देती थीं। अब मनोरंजक गतिविधियों और शक्ति मिले, बुद्धि मिले और बने दमदार...आयरन की मीठी गोली खानी हर शनिवार जैसे प्रेरणादायी शक्तिमंत्रों के कारण खुशी-खुशी मांगकर खा रही हैं।