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Kanpur: ट्रेनों में सीट के साथ गैलरी और शौचालय भी बिक रहे, जनरल टिकट के यात्रियों से हो रही है वसूली

Fri, 04 Jul 2025 11:41 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: सेंट्रल स्टेशन से प्रतिदिन करीब तीन सौ ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें डेढ़ लाख तक यात्री सफर करते हैं। अवैध रूप से स्लीपर से लेकर एसी थर्ड तक में यात्रियों से वसूली कर बैठने की जगह दी जाती है। इस वजह से आरक्षण टिकट पर यात्रा करने वालों को दिक्कत होती है।
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गोरखपुर ट्रेन के गेट पर बैठे यात्री - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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ट्रेनों में सीट ही नहीं, गैलरी और शौचालय भी बिक रहे हैं। जनरल टिकट पर आरक्षण बोगी में यात्रा करने वालों से वसूली की जा रही है। गुरुवार को सेंट्रल स्टेशन पर खचाखच भरी ट्रेनों के यात्रियों से बात की गई तो इसका खुलासा हुआ। इसमें कोच अटेंडेंट, ट्रेन टिकट निरीक्षक (टीटीई), सुरक्षा में तैनात जवानों का गठजोड़ काम कर रहा है। इससे आरक्षित टिकट पर यात्रा करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अक्सर विवाद भी होता है।

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कानपुर सेंट्रल स्टेशन से प्रतिदिन दिल्ली-हावड़ा, लखनऊ वाया कानपुर-झांसी मुंबई, बुंदेलखंड रेलमार्गों की 300 ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें विशेष और नियमित ट्रेनें भी हैं। इन ट्रेनों में जनरल टिकट वालों से वसूली कर आरक्षित बोगियों में यात्रा कराई जा रही है। यहां सीटों के साथ फर्श, दरवाजों के पास का स्थान भी बेचा जा रहा है। इसके लिए 50 रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक वसूली हो रही है। निगरानी के लिए लगाए गए अफसर व विजिलेंस टीमें भी इसे नजरअंदाज कर रही हैं।

ट्रेन में शौचालय के पास खड़े यात्री - फोटो : amar ujala
डेढ़ लाख यात्री करते हैं यात्रा
कभी-कभी तो यह अवैध यात्री स्लीपर कोच के गेट तक नहीं खोलते, जिससे आरक्षण लेने वालों को ट्रेन में चढ़ने में परेशानी उठानी पड़ती है। सेंट्रल स्टेशन से प्रतिदिन करीब तीन सौ ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें डेढ़ लाख तक यात्री सफर करते हैं। अवैध रूप से स्लीपर से लेकर एसी थर्ड तक में यात्रियों से वसूली कर बैठने की जगह दी जाती है। इस वजह से आरक्षण टिकट पर यात्रा करने वालों को दिक्कत होती है। साथ ही, महिला, दिव्यांग कोचों में भी वसूली की जाती है।

जनरल बोगी में चढ़ते यात्री - फोटो : amar ujala
  • दोस्त के साथ सिक्किम-महानंदा से दिल्ली जा रहे थे। एस-5 कोच में चढ़ गए। टिकट तो ली ही थी, साथ ही कोच के दरवाजे पर बैठने के लिए दो सौ रुपये भी देने पड़े।  -विपिन, पिसराहन, बिहार
  • ट्रेन नंबर-15066, गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस से अपने घर जाने के लिए एस-टू कोच में चढ़े। गोंडा तक जाने के लिए डेढ़ सौ रुपये दिए, जब शौचालय के पास बैठने की जगह मिली।  -सत्या, गोंडा
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सेंट्रल स्टेशन की ट्रेनों में भीड़ - फोटो : amar ujala
स्लीपर कोच में बैठने के लिए टिकट आरक्षण जरूरी है। समय-समय पर अभियान चलाकर कोच में अवैध रूप से यात्रा करने वालों पर कार्रवाई की जाती है। जून में ही स्लीपर कोच में यात्रा करन वालों से मंडल में 9.57 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। अगर कोई सीट या शाैचालय में बैठने के लिए वसूली करता है तो गलत है। पीड़ित यात्री 139 या रेल मदद एप पर शिकायत करें, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।  -अमित कुमार सिंह, रेलवे जनसंपर्क अधिकारी प्रयागराज
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