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Kanpur: मेडिकल काॅलेज से 2400 कर्मियों का ब्योरा ले गई एजेंसी, कश्मीरी छात्रों से कर सकती हैं पूछताछ

Sun, 16 Nov 2025 01:51 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कॉर्डियोलॉजी में तीन स्तरीय वेरिफिकेशन की तैयारी शुरू हो गई है। लोकल स्तर पर अस्पताल प्रशासन अपने नए प्रवेश लेने वाले 30 छात्रों का वेरिफिकेशन करेगा। इसके लिए दस बिंदुओं का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज जांच के लिए पहुंची खुफिया एजेंसियां - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में डाॅ. शाहीन और डाॅ. आरिफ के आपस में नेटवर्क का पता चलने के बाद सुरक्षा एजेंसी ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्टॉफ का ब्योरा जुटाया है। शनिवार को लगभग 2400 लोगों को ब्योरा ले गई। इसमें अस्पताल में कार्यरत नर्स, पैरामेडिकल स्टॉफ और कर्मचारी शामिल हैं। इसके पहले टीम डाॅक्टर का ब्योरा ले गई थी। डाॅ. शाहीन फार्माकोलॉजी विभाग में 2006 में भर्ती हुई और 2013 में चली गई थी। इस दाैरान क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाए थे।

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इसी कारण डाॅ. शाहीन से जुड़े लोगों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां लगी हैं। वह डाॅक्टर और कर्मियों के ब्योरा जुटा रही हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और कॉर्डियोलॉजी में शनिवार को दिनभर सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी घूमते रहे। मेडिकल कॉलेज से करीब 13 सौ से ज्यादा कर्मचारी, 550 पैरामेडिकल स्टाफ और 520 नर्सों के नाम, पिता का नाम, राज्य, मोबाइल नंबर और कब से यहां काम कर रहे आदि जानकारी जुटाई है।

खामोशी में काम कर रहे हैं डॉक्टर
सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और डॉक्टरों से पूछताछ के चलते हैलट, कॉर्डियोलॉजी, मुरारीलाल चेस्ट और मेडिकल कॉलेज में कार्यरत फैकल्टी, डॉक्टर व जेआर अजीब सी खामोशी में काम कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पहली बार एक बुद्धजीवी वर्ग से किसी ने ऐसा जघन्य काम किया है। टीम कब किसे ले जाएगी या पूछताछ करेगी नहीं पता। वहीं, हैलट इमरजेंसी में हंसी मजाक के साथ काम करने वाला माहौल गायब रहा। यहां सभी गुमसुम तरीके से काम करते रहे।
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कश्मीरी छात्रों से एजेंसी कर सकती पूछताछ
कॉर्डियोलॉजी में तीन स्तरीय वेरिफिकेशन की तैयारी शुरू हो गई है। लोकल स्तर पर अस्पताल प्रशासन अपने नए प्रवेश लेने वाले 30 छात्रों का वेरिफिकेशन करेगा। इसके लिए दस बिंदुओं का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसमें नाम, मोबाइल नंबर, माता-पिता का नाम, घर का पता, पुराने स्कूल-कॉलेजों की जानकारी आदि शामिल है। इसके बाद पुलिस वेरिफिकेशन और विजिलेंस जांच होगी। वहीं, कश्मीरी छात्रों से अलग से एजेंसी पूछताछ कर सकती है।
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