दायित्वों के निर्वहन और शासकीय कार्यों में उदासीनता बरती
नगर निगम में विभिन्न कार्यों को कराने के लिए कुछ कर्मियों और ठेकेदारों के पास पूरे कागजात न होने के बाद भी उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए पंजीकृत किया गया। फर्मों के पंजीकरण और उनके कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने का प्रमुख दायित्व मुख्य अभियंता का होता है, लेकिन उन्होंने फर्माें के अभिलेखों का बिना परीक्षण या भौतिक सत्यापन किए ही विभिन्न कार्य आवंटित कराए। मुख्य अभियंता ने पंजीकरण कराने व पूर्व से पंजीकृत फर्मों के प्रपत्रों की जांच न कर अपने दायित्वों के निर्वहन और शासकीय कार्यों में उदासीनता बरती है।
पांच कंपनियां ब्लैकलिस्टेड की गई थीं
इसलिए मुख्य अभियंता एसएफए जैदी का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त के साथ शासन को भी भेजी गई है। अब तक इन पर हो चुकी कार्रवाई नगर निगम के टेंडर घोटाले में 25 अगस्त को पांच ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही पांच कंपनियां ब्लैकलिस्टेड की गई थीं। इसमें दो ठेकेदार संदीप जैन व रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार किया गया था जबकि सरगना गोविंद शर्मा हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लेकर गायब है। मामले में ठेकेदार फर्म दिलीप बाजपेई एंटरप्राइजेज, अजय एंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर, तिरुपति और कैला एंटरप्राइजेज पर कार्रवाई हुई थी।
दो जेई सहित तीन का हो चुका निलंबन
अब तक फर्म पंजीकरण मामले में निगरानी न करने, बिना सत्यापन पंजीकरण करने में अभियंत्रण विभाग के वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह, दो जेई अमनदीप सिंह और बालेंद्र कुमार का निलंबन किया जा चुका है। वर्षों से एक ही विभाग में डटे लिपिक संजय कटियार, रहमान व दिनेश प्रसाद को इधर से उधर किया गया है। एसआईटी के साथ ही मंडलायुक्त के निर्देश पर सीडीओ के नेतृत्व में गठित कमेटी भी अलग-अलग जांच कर रही है।
मुख्य अभियंता साथ लाए थे चहेते ठेकेदार
नगर निगम में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद से ही मुख्य अभियंता एसएफए जैदी पर आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि लखनऊ से तबादला होकर कानपुर आने पर वह तीन ठेकेदारों को साथ लाए थे और यहां कई कार्य आवंटित किए। इसके अलावा कुछ फर्माें को लाभ देते हुए टेंडर भी दिलाए। इसे लेकर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय भी पूर्व में शासन को पत्र भेजा था, इसमें मुख्य अभियंता स्तर के दूसरे अधिकारी को जांच के लिए नियुक्त करने की मांग की थी। इसके बाद ही शासन के निर्देश पर मंडलायुक्त कार्यालय से जांच समिति का गठन किया गया था।