डॉक्टर के घर से बेटे को गिरफ्तार किया
हालांकि मामले में काफी विवाद उठने के बाद पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने प्रकरण की विवेचना एसीपी कर्नलगंज महेश कुमार को सौंपी। एसीपी ने बारीकी से विवेचना की और साक्ष्यों और पीड़ित पक्ष, घटनास्थल पर मौजूद लोगों और मृतकों के पंचायतनामा की कार्रवाई में शामिल रहे लोगों के बयान के आधार पर धारा 304 ए में दर्ज इस मामले को गैर इरादन हत्या में बदला दिया। मंगलवार को एसीपी की अगुवाई में गठित पुलिस टीम ने काकादेव निवासी डॉक्टर के घर से उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया।
बर्रा हादसे के बाद अधिकारियों की नजर में आया मामला
हादसे के बाद से लगातार इस मामले में कई तरह की चर्चाएं चल रही थी। कहा जा रहा था कि पुलिस मामले में लीपापोती कर रही है। हालांकि इसी बीच डॉक्टर के आरोपी बेटे ने बर्रा में बीते माह अनियंत्रित गति से कार चला कर एक और व्यक्ति को घायल कर दिया। इसके बाद पुलिस अधिकारी इसे लेकर सतर्क हो गए और एसीपी को जांच सौंप दी गई।
अमर उजाला ने किया था खेल का खुलासा, तो बदली जांच की दिशा
बैराज पर हुए हादसे में दो नाबालिगों की मौत के बाद भी केस में हो रहे खेल का अमर उजाला ने स्टिंग ऑपरेशन कर खुलासा किया था। पता चला था कि मामले को खत्म कराने के लिए 21 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। बजरंग दल के एक नेता और एक अधिवक्ता ने भूमिका निभाई। मृतक आशीष के परिजनों ने बेटे की मौत के एवज में 1.10 लाख रुपये मिलने की बात स्वीकारी थी।
एसीपी को जांच सौंप दी, फिर सारी सच्चाई सामने आ गई
सागर के परिजनों ने रकम की बात नहीं कबूली। चर्चा थी कि दोनों पीड़ित परिवारों को नौ-नौ लाख रुपये दिए गए हैं। पड़ताल में यह भी सामने आया था कि तत्कालीन नवाबगंज थाना प्रभारी, गंगा बैराज चौकी प्रभारी और थानेदार के कारखास को भी मोटा हिस्सा गया था। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने एडीसीपी को जांच के आदेश दिए थे। फिर उनके तबादले के बाद एसीपी को जांच सौंप दी, जिसमें सारी सच्चाई सामने आ गई।