आईआईटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र धीरज सैनी (22) ने फांसी लगाकर जान दे दी। उसका शव बुधवार को पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला। वह रविवार की रात से छात्रावास में दिखाई नहीं दिया था। उसके कमरे से बदबू आने पर संस्थान प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी थी। छात्र के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। प्रारंभिक जांच में पुलिस छात्र के आत्महत्या करना वजह अवसाद मान रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
महेंद्रगढ़ के बुचौली रोड शकरकुई निवासी हलवाई सतीश सैनी का पुत्र धीरज सैनी आईआईटी के छात्रावास एक के कमरा नंबर 123ए में रह रहा था। वह रविवार से छात्रावास में दिखाई नहीं दिया। बुधवार को उसके बगल के कमरे में रहने वाले छात्रों ने बदबू आने की शिकायत की। कुछ छात्रों ने धीरज सैनी के कमरे के दरवाजे को खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। संस्थान प्रशासन को मामले की जानकारी दी गई। वार्डन और आईआईटी के सुरक्षाकर्मियों ने जांच कर पुलिस को सूचित किया। सुबह करीब नौ बजे कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। अंदर धीरज सैनी का शव फंदे से लटक रहा था। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच की। अंदर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। छात्र के मोबाइल, लैपटॉप और अन्य वस्तुओं को जांच के लिए कब्जे में ले लिया। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य बरामद किए हैं। संस्थान प्रशासन ने छात्र के परिजनों को घटना की सूचना दे दी। डीसीपी पश्चिम दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि छात्र के आत्महत्या करने की वजह अब तक पता नही चली है, लेकिन साथियों ने उसके कुछ दिनों से गुमसुम रहने की जानकारी दी है। वह आखिर किन कारणों से गुमसुम था इसका पता लगाया जा रहा है।