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Kanpur: शहर में 500 कमेटियां निकालेंगी जवारा और सांग यात्रा, दो क्विंटल की सांग को लेकर चलते हैं 10 लोग

Thu, 03 Apr 2025 12:04 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: सांग यात्रा निकालने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पांच से 50 साल तक के लोग सांग लगवाते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चैत्र नवरात्र में मां जगदंबा को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु हर जतन कर रहे हैं। इन्हीं में जवारा व सांग यात्रा की भी परंपरा है। शहर में यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यहां करीब 500 कमेटियां सप्तमी, अष्टमी और नवमी को जवारा और सांग यात्रा निकलती हैं। वहीं, यात्रा को लेकर सांगों में धार देने का काम शुरू हो गया है। जवारे भी तैयार हो रहे हैं।\
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चैत्र नवरात्र में ही जवारा व सांग यात्रा निकलती है। नवरात्र पूजन के साथ ही जवारे बोए जाते हैं। सांग का भी पूजन होता है। पीरोड बाबा वनखंडेश्वर जवारा कमेटी के आशू सैनी ने बताया कि कमेटी 33 साल से जवारा यात्रा निकाल रही है। इस बार पांच अप्रैल को यात्रा निकलेगी और यह बारादेवी मंदिर जाएगी। कमेटी करीब 350 लोगों को सांग लगा रही है। इनमें पांच से 50 साल तक के महिला-पुरुष शामिल हैं। माता की पूजा के बाद उनकी अनुमित लेकर सांग की घिसाई, धार और पेंट का काम चालू है।

आनंदबाग जीवनलाल का हाता की मां विंध्यवासिनी जवारा कमेटी के कुलदीप ने बताया कि उनकी कमेटी 58 साल पुरानी है। इसकी शुरुआत बाबा कक्का ने की थी। कमेटी 300 लोगों को सांग लगाती है। सांग यात्रा तपेश्वरी मंदिर तक जाती है। इस बार यात्रा सात अप्रैल को निकलेगी। वहीं, श्री ज्वाला माता सेवा समिति के अध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि उनकी कमेटी 20 साल से सांग यात्रा निकाल रही है, जो ज्वालादेवी मंदिर पहुंचती है। कमेटी करीब 200 लोगों को सांग लगाती हैं। गोविंदनगर कच्ची बस्ती के संजय ने बताया कि टोलियां बनाकर जवारा और सांग यात्रा निकालते है। यह पंचमी से शुरू होती है और रोजाना दशमी तक निकलती है।
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मान्यता: जवारा के रंग से शुभ-अशुभ के मिलते हैं संकेत
सांग को फूलों, पान, तिलक व झालरों से सजाया जाता है। देवी-देवताओं की तस्वीरें व धार्मिक प्रतीक लगाए जाते हैं। मान्यता है कि जवारा माता दुर्गा का प्रतीक है। इसकी पूजा से माता की कृपा बरसती है। जवारा लगाने से बारिश, फसल और व्यक्ति के भविष्य का पता लगाते हैं। जवारा उचित आकार और लंबाई में नहीं उगते हैं तो उस साल बारिश व फसल भी कम होती है। जवारा के रंग शुभ-अशुभ का संकेत देते हैं। विजय कुमार ने बताया कि उनके पास दो क्विंटल के सांग हैं। इसे करीब 10 लोग पकड़कर चलते हैं। कुलदीप ने बताया उनके पास एक क्विंटल एक किलो वजनी सांग है। वहीं, गोविंदनगर के संजय ने बताया कि उनके पास ढाई, डेढ़ और एक क्विंटल की सांग हैं। इनकी लंबाई 15 से 20 फीट की है।

 
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शहर में पहले थीं पांच कमेटियां
संजय के अनुसार पहले शहर में मीरपुर तोपखाना, लालबांगला, वनखंडेश्वर मंदिर पी रोड, जेके मंदिर और बारादेवी में जवारा कमेटियां थी। वर्तमान में करीब 400 स्थानों से जवारा यात्रा निकलती है। इनमें पीरोड, ज्वाला देवी, गीता पार्क, जवाहरनगर, बर्रा, रावतपुर, मसवानपुर, कल्याणपुर, नवाबगंज, खाड़ेपुर, लक्ष्मीपुरवा रायपुरवा, डिप्टी पड़ाव आदि शामिल हैं। बारादेवी, गोविंदनगर, पीरोड और चकेरी क्षेत्र में करीब 40-40 से अधिक टोलियां हैं। कमेटियां ट्रैफिक पुलिस, फायर से अनुमति भी लेती हैं।
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