वार्ड-78 को प्रदेश में पहला स्थान
शहर की ओवरऑल रैंकिंग भले ही गिरी हो, लेकिन सिविल लाइंस स्थित वार्ड-78 ने प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरे का निस्तारण, धूल नियंत्रण, सीएंडडी वेस्ट प्रबंधन, हरित क्षेत्र विकसित करने और जनजागरूकता के कामों के आधार पर वार्ड को यह स्थान मिला। प्रयागराज का वार्ड-33 दूसरे और बरेली का गांधी उद्यान वार्ड-32 तीसरे स्थान पर रहा। पर्यावरण अभियंता दिवाकर भास्कर ने बताया कि इस बार शहर से तीन वार्डों 23, 37 और 78 ने ही प्रतिभाग किया था। इसमें वार्ड 78 को प्रदेश में पहला स्थान मिला है।
कंपनी बाग चौराहा पर डाट नाले के धंसने से खुदी पड़ी सड़क
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300 करोड़ खर्च, फिर भी रैंकिंग में पहुंचे नीचे
शहर की हवा साफ करने के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने और कई योजनाएं चलाने के बावजूद रैंकिंग में इस बार गिरावट आई है। नगर निगम ने सड़क सुधार, इंटरलॉकिंग टाइल्स, वाटर स्प्रिंकलर, मियावाकी पद्धति से नौ नमो वन, मैकेनिकल स्वीपिंग और स्मार्ट कूड़ाघरों समेत कई कार्य कराए हैं। इससे इन योजनाओं के जमीनी असर पर सवाल उठ रहे हैं।
इन वजहों ने घटाई रैंक
शहर में वायु प्रदूषण की बड़ी वजह सड़कों की बदहाल स्थिति है। कई मार्गों पर छह-सात इंच से लेकर डेढ़ फीट तक गहरे गड्ढे हैं। वाहनों के गुजरने से धूल लगातार हवा में रहती है। किदवईनगर, यशोदनगर, कर्रही, लालबंगला और काकादेव के साथ कल्याणपुर क्षेत्र में जीटी रोड पर भी धूल की समस्या बनी हुई है। इन स्थानों पर नियमित सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय प्रभावी नहीं हो सके हैं। मेट्रो, सीवर लाइन, पाइपलाइन और अन्य विकास कार्यों के लिए जगह-जगह हुई खोदाई ने भी समस्या बढ़ाई है।
पानी के छिड़काव की निगरानी कमजोर रही
स्वरूपनगर समेत विभिन्न मोहल्लों में सीएम ग्रिड योजना के तहत बन रही 10 सड़कों में मानकों के पालन पर भी सवाल उठे हैं। निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के इंतजाम और नियमित पानी के छिड़काव की निगरानी कमजोर रही है। फुटपाथों की बदहाल स्थिति, उजड़ी ग्रीनबेल्ट, घटता हरित क्षेत्र और खुले में पड़ा कचरा भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। कई जगह कूड़े और पत्तियों में आग लगाए जाने से भी प्रदूषण बढ़ रहा है।
सिर्फ नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं
वायु गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी नगर निगम के साथ उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यातायात एवं परिवहन विभागों की भी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों की निगरानी करनी होती है। वहीं, यातायात एवं परिवहन विभाग वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार हैं। विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय और योजनाओं की नियमित निगरानी में कमी का असर रैंकिंग पर पड़ा है।
पनकी में कूड़े के ढेर में लगी भीषण आग
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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग में गिरावट के बावजूद वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल नियंत्रण, सड़क सुधार, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष जोर है, जिसका असर आने वाले समय में बेहतर रैंकिंग के रूप में दिखेगा। -अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त
पनकी साइट नंबर-5 पर फैली गंदगी
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वार्ड-78 में किए गए यह दावे
- 14.60 टन ठोस अपशिष्ट का प्रसंस्करण।
- 2.92 टन प्लास्टिक रिसाइक्लिंग।
- ठोस प्लास्टिक के 10 प्रतिशत का 24 घंटे में निस्तारण।
- 19 किलोमीटर सड़क पैचहोल फ्री।
- 1.50 किलोमीटर क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित।
- स्कूल-कॉलेजों में जनजागरूकता अभियान।
- ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना।
- 14 स्थानों पर मियावाकी पौधरोपण।
- 8986 घरों को एलपीजी/पीएनजी से जोड़ा गया।