एकतरफा प्रेम में विधवा को तेजाब से जला देने के मामले में दोषी को अपर जिला जज तृतीय कंचन सागर ने 30 साल की कठोर कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की पूरी रकम पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। आरोपी दो बच्चों का बाप है।
महिला एक जनवरी 2022 को सड़क दुर्घटना में पति की मौत के बाद बिधनू की खरगपुर सोसाइटी स्थित मायके में रहने लगी थी। रस्सी फैक्टरी में काम करके भरण-पोषण करती थी। चार मई 2022 को कल्याणपुर मवईया निवासी अजय घर आया और शादी का प्रस्ताव रखा। विरोध करने पर साथ लेकर आए डिब्बे से तेजाब उसके ऊपर डाल दिया। पड़ोसियों ने पुलिस और महिला के पिता को सूचना दी और उर्सला फिर लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
एडीजीसी ओमेंद्र दीक्षित ने बताया कि पिता ने 14 सितंबर 2022 को कोर्ट में आरोप तय हुए थे। अभियोजन की ओर से पीड़िता और उसके पिता सहित सात गवाह कोर्ट में पेश हुए। आरोप तय होने के बाद 16 माह में मुकदमे की पूरी कार्रवाई खत्म हो गई। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने अजय को दोषी मानकर सजा सुनाई।
पीड़िता की बहादुरी को कोर्ट ने सराहा
पीड़िता ने बयान में कहा था कि अजय के घरवाले समझौते का दबाव बनाते थे। समझौता न करने पर धमकी देते थे कि अजय छूटकर आएगा तो जान से मार डालेगा। फैसले में कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने न सिर्फ अपनी चोटों को सहन किया बल्कि खुद न्यायालय में गवाही देकर बहादुरी से पूरी घटना को बताया। इस घटना का भार पीड़िता को पूरे जीवन उठाना होगा, इसलिए अजय को 30 साल की कठोर कारावास देने से ही न्याय की मंशा पूरी होगी।
कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, ठुकराई रहम की अपील
सुनवाई के दौरान एडीजीसी ओमेंद्र दीक्षित ने तर्क रखा कि पीड़िता पर तेजाब डालकर अभियुक्त ने गंभीर सामाजिक अपराध किया है, इसलिए कठोर दंड दिया जाए, जबकि बचाव पक्ष ने पहला अपराध होने के आधार पर रहम की दुहाई दी थी। कोर्ट ने कहा कि अजय का अपराध गंभीर है। एसिड अटैक की चोटों की शारीरिक सीमाएं गहरी और स्थायी होती हैं जो उनके मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यक्षमता पर सीधा प्रभाव डालती हैं। विकृति और विकलांगता के परिणामस्वरूप पीडि़त स्थायी रूप से दुर्बल हो जाते हैं और उन्हें अपना जीवन, अपना काम, अपनी शिक्षा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कोर्ट ने रहम की अपील ठुकराते हुए सख्त सजा सुनाई।