कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर बुधवार को तीन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 1458 मजदूर कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंचे। मजदूरों को खाना-पानी देकर थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई और रोडवेज बसों से यूपी के अलग-अलग शहरों में भेजा गया। पहली बार श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को बीच में रोककर उतारा गया।
ये ट्रेनें वाराणसी और गोरखपुर जा रही थीं। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए अभी तक नियम था कि ट्रेन जिस स्टेशन तक जा रही, वहीं रुकेगी। सुबह साढ़े नौ बजे गांधीनगर (गुजरात) से वाराणसी जाने वाली ट्रेन में 449 श्रमिक सेंट्रल पर उतरे। दोपहर डेढ़ बजे भावनगर (गुजरात) से वाराणसी जाने वाली ट्रेन से 247 श्रमिक सेंट्रल पर उतरे।
दोपहर दो बजे चित्तूर (आंध्र प्रदेश) से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन से 762 श्रमिक कानपुर सेंट्रल पर उतारे गए। ये श्रमिक कानपुर और आसपास के जिलों के थे। 48 बसों से यात्रियों को यूपी के अलग-अलग जिलों को रवाना किया गया। इन ट्रेनों में रायबरेली, प्रतापगढ़, फैजाबाद, सुल्तानपुर, जालौन, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हमीरपुर, चित्रकूट के मजदूर शामिल थे।
सभी मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग कराकर उनको होम क्वॉरंटीन की मुहर लगाई गई। इस दौरान कानपुर सेंट्रल के निदेशक हिमांशु शेखर उपाध्याय, आरपीएफ के एसी आरएन पांडेय, वाणिज्य निरीक्षक ज्ञान प्रकाश सिंह, एसएस आरएनपी त्रिवेदी, डिप्टी एसएस करुणानिधि भारद्वाज आदि का सहयोग रहा।