इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा का कहना है कि जाड़े में रोगियों की तबीयत अधिक बिगड़ती है। एहतियात बरतने के साथ रोगी कंट्रोल रूम से संपर्क करके अपनी समस्या बता सकते हैं। रोगी को दिक्कत होने पर परिजन तुरंत अस्पताल लेकर आएं। इधर-उधर भटकने से रोगी की स्थिति और खराब हो सकती है। वहीं, न्यूरो साइंसेज विभाग में बुधवार को मस्तिष्क की नस फटने के 10 रोगियों को भर्ती किया गया। सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता ने बताया कि मस्तिष्क की नस फटने के वार्ड में 20 रोगियों का इलाज चल रहा है।
ठंड है बहुत, सावधानी बरतें
- ठंडे पानी से मत नहाएं, गर्म करके नहाएं।
- ब्लड प्रेशर की दवा समय से खा लें, बीच में न छोड़ें।
- चक्कर, आंखों के सामने अंधेरा, पैरों में कंपन जैसे लक्षण हों तुरंत अस्पताल पहुंचें।
- गर्म कमरे से अचानक बाहर ठंड में न निकलें।
- गरिष्ठ भोजन न लें, हल्का सुपाच्य पौष्टिक भोजन ही लें।
- रात को खाना खाकर तुरंत मत सोएं।