यूपी में कन्नौज बस हादसे में गैर इरादतन हत्या के आरोपी फर्रुखाबाद और हमीरपुर के एआरटीओ को पुलिस ने अपनी विवेचना में क्लीन चिट देते हुए मुकदमे में एफआर लगा दी है। इस हादसे में दस लोगों की जान गई थी। दोनों एआरटीओ के खिलाफ सामान्य बस को स्लीपर बनाने का आदेश देने के आरोप में आरटीओ प्रवर्तन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
कन्नौज जिले की छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव घिलोई में 30 जनवरी 20 को बस और ट्रक टकराने से ट्रक चालक समेत 10 यात्रियों की मौत हो गई थी। बस फर्रुखाबाद निवासी विमल चतुर्वेदी की थी। जांच में पाया गया था कि सामान्य बस को स्लीपर में तब्दील किया गया था। ये आदेश तत्कालीन एआरटीओ मोहम्मद हसीब खां और एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय के कार्यकाल में किए गए थे।
मोहम्मद हसीब खां इस समय हमीरपुर जिले में एआरटीओ प्रशासन हैं। इस लापरवाही के कारण 19 फरवरी 2020 को आरटीओ प्रवर्तन कानपुर राकेश सिंह ने फतेहगढ़ कोतवाली में शांतिभूषण पांडेय और मोहम्मद हसीब के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
शासन ने दोनों को निलंबित कर दिया था जो हाईकोर्ट के आदेश पर बहाल हो गए थे। मुकदमे की विवेचना कर्नलगंज चौकी इंचार्ज तेजबहादुर सिंह कर रहे थे। एआरटीओ कार्यालय से विमल चतुर्वेदी की 17 बसों को सामान्य से स्लीपर में बदलने के आदेश की पत्रावली गायब करा दी गई थीं।
दोनों एआरटीओ और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। कोतवाल जयप्रकाश पाल ने कहा कि विवेचक तेजबहादुर सिंह ने गुण दोष के आधार पर फाइनल रिपोर्ट लगाई होगी। इसमें मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।