युवक किशोरी को भगाकर चेन्नई ले गया और वहां उसके साथ शादी कर शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों को पकड़ा। मामले की विवेचना कर एसआई त्रिभुवन प्रसाद वर्मा ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर गुरुवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की जज अलका यादव दोषी मोनू शर्मा को दोषी करार देते हुए 20 साल कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 27 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जुर्माने की रकम पीड़िता को दिए जाने का आदेश दिया है।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
कोर्ट ने धारा 363 में पांच साल कारावास व पांच हजार रुपये, 366 में सात साल कारावास व सात हजार रुपये 376(3) में 20 साल कारावास व 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेगी। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।
किशोरी ने पति बताकर पक्ष में दिया था बयान
पुलिस के हाथ लगने के बाद किशोरी ने कोर्ट में मोनू शर्मा के पक्ष में बयान दिया था। उसने मोनू शर्मा को पति बताया था। उसका कहना था कि वह मर्जी से साथ में रह रही थी। कोर्ट ने इस आधार पर उसका बयान पर रजामंदी नहीं दी कि घटना के दौरान वह नाबालिग थी। उसको नाबालिग पाते हुए उसकी सहमति को कानूनी तौर पर सही नहीं माना था।