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Kannauj: किशोरी को भगाकर शादी करने वाले युवक को 20 साल की सजा, 27 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया

Thu, 08 Jun 2023 05:54 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज

सार

यूपी के कन्नौज जिले में किशोरी को बहलाकर भगा ले जाने और शादी करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को  20 साल कारावास की सजा सुनाई है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कन्नौज जिले में किशोरी को बहलाकर भगा ले जाने और शादी करने के मामले में चार साल बाद कोर्ट ने सजा सुनाई है। कोर्ट ने युवक को दोषी करार देते हुए 20 साल कारावास व 27 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर एक साल अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। मामले में सात गवाह पेश किए गए थे। मामले की विवेचना एसआई त्रिभुवन प्रसाद वर्मा ने की थी।

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विशेष शासकीय अधिवक्ता किशोर दोहरे व शासकीय अधिवक्ता नवीन दुबे ने बताया कि इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला ने नौ अगस्त 2018 को थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री व पुत्र कस्बे के ही एक इंटर कॉलेज में पढ़ते हैं। स्कूल जाते समय रास्ते में बेटे की साइकिल पंचर हो गई थी। बेटा साइकिल को ठीक करवाने के लिए चला गया। तभी फर्रुखाबाद जनपद के जहानगंज निवासी मोनू शर्मा बेटी को बहला फुसलाकर भगा ले गया।

युवक किशोरी को भगाकर चेन्नई ले गया और वहां उसके साथ शादी कर शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों को पकड़ा। मामले की विवेचना कर एसआई त्रिभुवन प्रसाद वर्मा ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर गुरुवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की जज अलका यादव दोषी मोनू शर्मा को दोषी करार देते हुए 20 साल कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 27 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जुर्माने की रकम पीड़िता को दिए जाने का आदेश दिया है।

इन धाराओं में सुनाई गई सजा
कोर्ट ने धारा 363 में पांच साल कारावास व पांच हजार रुपये, 366 में सात साल कारावास व सात हजार रुपये 376(3) में 20 साल कारावास व 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेगी। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।
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किशोरी ने पति बताकर पक्ष में दिया था बयान
पुलिस के हाथ लगने के बाद किशोरी ने कोर्ट में मोनू शर्मा के पक्ष में बयान दिया था। उसने मोनू शर्मा को पति बताया था। उसका कहना था कि वह मर्जी से साथ में रह रही थी। कोर्ट ने इस आधार पर उसका बयान पर रजामंदी नहीं दी कि घटना के दौरान वह नाबालिग थी। उसको नाबालिग पाते हुए उसकी सहमति को कानूनी तौर पर सही नहीं माना था।
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