कानपुर के भीतरगाव में श्रीकृष्ण और बलदाऊ की बड़ी ही श्रद्धा और धूमधाम के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। महिलाएं व बच्चे अपनी अपनी छतों से पुष्पवर्षा कर रही थीं। जिसमें कस्बावासियों के साथ आसपास के ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सैकड़ों की तादाद में जुटे श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ डीजे की धुनों में नाचते झूमते शोभायात्रा के साथ चल रहे थे। शोभायात्रा की पूरी कमान युवाओ की टीम संभाले दिखी।
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शोभायात्रा में जहां भगवान श्रीकृष्ण व बलदाऊ के घोङों को खूब सजाया गया था। श्रीकृण्ण और बलदाऊ दोनों घोड़े में सवार थे। जबकि सखियाँ रथ में सवार होकर नगर भ्रमण किया। यात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा एवं आरती कर लोगों ने स्वागत किया।
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कंस वध के साथ गूंज उठा, जय कन्हैया लाल की
भीतरगांव में चल रही 142वीं श्रीकृष्ण लीला में कंश वध होते ही दस दिवसीय ऐतिहासिक मेला शुक्रवार की शाम से शुरू हो गया। लीला के अंतिम दिन तालाब में नाग लीला और मेला मैदान में कंस वध का मंचन किया गया। मेले में देर रात तक दुकानों को सजाने का क्रम जारी रहा।
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श्रीकृष्ण लीला समारोह के सदस्य युवा रत्नाकर तिवारी, अवनीश कुशवाहा, नितीश अवस्थी, अम्बरीश कुमार, हीरू शुक्ला, मयंक कुमार, अभिषेक कुशवाहा, लवकुश, अक्षय शुक्ला, अर्पित सहित युवाओं की टीम ने शोभा यात्रा को सफल बनाने मे सहयोग किया । लीला कमेटी के महामंत्री सर्वेश त्रिपाठी राजन तिवारी डा दिनेश कुशवाहा ने बताया कि छै दिवसीय श्रीकृष्णलीला के अंतिम दिन कंस वंध लीला के साथ ही दस दिवसीय मेला शुरू हुआ है।
ग्वाल-बालों के साथ निकले भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। देर शाम शोभायात्रा कस्बे के बङे तालाब पहुची जहा नाव में सवार होकर नागलीला का मंचन किया। इसके बाद श्रीकृण्ण बलदाऊ की टीम कंस मैदान में पहुंची, जहां कृष्ण और उनके भाई बलदाऊ ने कंस का वध किया।कंस वध का मंचन होते ही मौजूद जनसमुदाय ने श्रीकृष्ण और बलराम के जयकारे लगाये।