18 नवंबर 1946 को कानपुर में जन्मे कमलनाथ आज मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा हैं। कमलनाथ की प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में हुई। पिता महेंद्र नाथ की इच्छा थी कि कमलनाथ वकील बने। लेकिन कमलनाथ की किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद कमलनाथ की आगे की पढ़ाई देहरादून के दून स्कूल में हुई। इसी स्कूल में उनके साथ इंदिरा गांधी के बड़े बेटे संजय गांधी भी पढ़ते थे। कानपुर से मध्य प्रदेश तक कमलनाथ कैसे पहुंचे ये भी बड़ी दिलचस्प कहानी है।
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डेमो पिक
समय के साथ ही कमलनाथ और संजय गांधी की दोस्ती दिन पर दिन गहरी होती गई। लेकिन दोनों की दोस्ती में दूरियां तब आ गईं जब कमलनाथ कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज चले गए।
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कमलनाथ
ये दूरियां महज दो स्कूल की थीं न कि दो दोस्तों के दिल की। दोनों की दोस्ती दूरियों के बावजूद कम नहीं हुई। ये दोस्ती सियासत में भी चर्चे में रहती थी कारण था दोनों का हरदम साथ रहना।
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कमल नाथ
बात है 1975 की जब कांग्रेस बेहद कठिन दौर से गुजर रही थी। इसके बाद 23 जून 1980 को संजय गांधी की असमय मौत की खबर ने नेहरू परिवार ही नहीं बल्कि समूचे देश को झकझोर कर रख दिया था। कांग्रेस में उठापटक का दौर जारी था।
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डेमो पिक
इसी दौरान कमलनाथ को संजय गांधी का जिगरी दोस्त होने का फायदा मिला। पार्टी आलाकमान ने कमलनाथ को छिंदवाड़ा सीट से टिकट दिया। यहां से चुनाव जीत कर कमलनाथ संसद पहुंचे।
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कमल नाथ
कमलनाथ की ये जीत पार्टी के लिए काफी हद तक संजीवनी साबित हुई। कमलनाथ 34 साल की उम्र में संसद पहुंचे। इसके बाद कमलनाथ 9 बार छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से संसद तक पहुंचने में कामयाब रहे।
कमलनाथ ने महज 22 साल की उम्र में कांग्रेस का हाथ थामा था। कांग्रेस की सियासत और नेहरू परिवार में कमलनाथ की हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सियासी गलियारों में एक बात प्रचलित थी...इंदिरा गांधी के दो हाथ संजय गांधी और कमलनाथ।