कालिंदी एक्सप्रेस को डिरेल करने की साजिश के मामले की जांच में जुटी एटीएस की टीम ने शिवराजपुर थानाक्षेत्र के मुड़ेरी गांव से एक हिस्ट्रीशीटर को उठाया है। उसके खिलाफ शहर और आसपास के जिलों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह काफी दिनों तक पश्चिम बंगाल में छिपा रहा। दो महीने पहले ही शहर वापस लौटा था। खुफिया एजेंसी पता कर रही है कि संदिग्ध किसी आतंकी संगठन से जुड़ा तो नहीं है। गांव के रहने वाले एक शख्स ने बताया कि सोमवार की देर रात सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिस कर्मी युवक को अपने साथ ले गई। वह पश्चिम बंगाल के अलावा आगरा में भी रह चुका है। उधर, टीम कन्नौज, छिबरामऊ, मकनपुर, बिल्हौर के कई लोगों पर स्थानीय पुलिस की मदद से नजर रखे हुए है।
300 घरों में दस्तक देगी पुलिस
डीसीपी पश्चिम राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आसपास की एजेंसियों से बीते दिनों में 300 लोगों को सिलिंडर सप्लाई किए गए हैं। इन सभी लोगों की सूची लेकर पुलिस की टीमें घर-घर जाकर सिलिंडर डिलीवरी की तस्दीक करेगी। पुलिस यह देखना चाहती है कि कहीं किसी को सिलिंडर डिलीवर करने के बाद उसका दुरुपयोग तो नहीं हुआ। साथ ही गैस एजेंसियों से सप्लाई का पूरा रिकार्ड भी मांगा गया है ताकि यह देखा जा सके कि कितने सिलिंडर बिके और कितने बुकिंग वाले उपभोक्ताओं को पहुंचाए गए।
लोकल माड्यूल द्वारा साजिश रचने की आशंका
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस तरह की घटनाएं खुरासान माड्यूल ही करवाता है। अधिकारियों का मानना है कि इस घटना में लोकल माड्यूल का प्रयोग किया गया है। हालांकि कोई भी अधिकारी इसे अब तक आतंकी घटना नहीं मान रहा लेकिन इस वारदात को करने की कोशिश करने वालों के संपर्क किसी माड्यूल से होने की आशंका जताई जा रही है।
रेलवे स्टेशन, बस स्टॉप, लखनऊ व कानपुर एयरपोर्ट पर भी नजर
एटीएस सूत्रों की माने तो घटना के बाद पुलिस के तुरंत सक्रिय होने की वजह से वारदात को अंजाम देने वाले आसपास ही छिपे हो सकते हैं। ऐसे में आसपास के जिलों के बस स्टॉप, रेलवे जंक्शन, लखनऊ और कानपुर एयरपोर्ट पर भी एजेंसियों ने निगरानी कर रखी है। इसके साथ ही कन्नौज और आसपास के जिलों के कप्तानों से भी जांच में सहयोग करने को कहा गया है।