दो साल पहले 21 अक्टूबर 2022 को अपर जिला जज प्रथम अजय कुमार त्रिपाठी ने धनतेरस के एक दिन पहले शहर के चर्चित ज्योति हत्याकांड का फैसला सुनाया था। 22 अक्तूबर को धनतेरस थी और दीपावली की छुट्टियां शुरू होने से एक दिन पहले ही कोर्ट का फैसला आ गया था। अब दो साल बाद एक बार फिर हाईकोर्ट से सजा के खिलाफ अपील पर फैसला आने की उम्मीद बंधी है।
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सेशन कोर्ट ने फैसले में माना था कि पीयूष ने ज्योति के अपहरण व हत्या का आपराधिक षड्यंत्र रचकर उसे अपहरणकर्ताओं के हवाले किया। साजिशन ज्योति के शव को न केवल छिपाया बल्कि गलत सूचना देकर पुलिस को भ्रमित भी किया। मनीषा प्रत्यक्ष रूप से घटनास्थल पर मौजूद नहीं थी, लेकिन पीयूष और सहअभियुक्तों के साथ लगातार फर्जी नामों से लिए गए सिम लगाकर मोबाइल से बात करना मनीषा के षड्यंत्र में शामिल होने की पुष्टि करता है। इसी तरह अवधेश, रेनू और सोनू ने ज्योति का अपहरण कर हत्या की और जेवर लूट लिए। आशीष ने भी हत्या और सबूत मिटाने में मदद की। इसलिए सभी हत्या के दोषी हैं।
सेशन कोर्ट ने मनीषा मखीजा के अलावा बाकी पांच अभियुक्तों को अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना था। मनीषा को सिर्फ हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना गया था। इसके अलावा पीयूष को पुलिस को गलत सूचना देने, अवधेश, रेनू और सोनू को लूटपाट तथा रेनू और सोनू को आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी माना गया था। सभी छह दोषियों के हत्या में शामिल होने के कारण उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, बाकी अपराध अलग होने के कारण जुर्माना अलग-अलग लगाया गया था। पीयूष पर 36 हजार रुपये, मनीषा पर 25 हजार रुपये, आशीष पर 35 हजार रुपये, अवधेश पर 40 हजार रुपये और रेनू व सोनू पर 41-41 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
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सजा सुनाने में महत्वपूर्ण साबित हुए थे कई सबूत ज्योति की डायरी - हत्या के बाद पुलिस को ज्योति के कमरे से उसकी डायरी मिली थी, जिसमें उसने पीयूष और उसके बीच किसी तीसरी लड़की के होने से उनके रिश्तों में कड़वाहट का जिक्र किया था। जांच में डायरी और ज्योति की लिखावट का मिलान भी हो गया था। सीसीटीवी फुटेज - रेस्टोरेंट के सीसीटीवी फुटेज में ज्योति को रेस्टोरेंट में अकेला छोड़कर बाहर आकर पीयूष द्वारा किसी से बात करना संदेहास्पद लगा था। एक मॉल से हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू खरीदने का सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को मिल गया था। चाकू पर ज्योति का खून - हत्या में इस्तेमाल चाकू को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। चाकू पर लगे खून और ज्योति के खून की मिलान हो गई थी। प्रयोगशाला की रिपोर्ट और चाकू को कोर्ट में सबूत के रूप में पेश किया गया था। कॉल डिटेल रिपोर्ट - पुलिस ने सभी आरोपियों, पीयूष के घरवालों, फैक्ट्री के कर्मचारियों के मोबाइल की कॉल डिटेल रिपोर्ट खंगाली थी। जांच के बाद पुलिस ज्योति के अपहरण व हत्या के बजाय षड्यंत्र के तहत हत्या किए जाने के नतीजे पर पहुंची थी।
पीयूष ने पुलिस को ये कहानी सुनाई
पीयूष 27 अप्रैल को पत्नी ज्योति को लेकर सीएसए चौराहा स्थित रैना मार्केट के वरांडा रेस्टोरेंट गया था। खाना खाकर रात लगभग 11:30 बजे दोनों कार से लौट रहे थे तभी सीएसए के पास चार मोटरसाइकिल पर सवार आठ लोग आए। कार रोककर पीयूष को मारापीटा और ज्योति का कार से ही अपहरण कर ले गए। उसी रात लगभग सवा एक बजे पुलिस को ज्योति का शव पनकी थाने के पीछे गली में कार के अंदर मिला था। ज्योति के शरीर पर चाकू से कई वार किए गए थे। ज्योति के गहने भी गायब थे। प्रथम दृष्टया लगा अपहरण, लूट व हत्या की वारदात है।
पुलिस के सामने थे ये सवाल
1- लूटपाट करने आए लुटेरों ने ज्योति का अपहरण क्यों किया
2- लूटपाट के बाद उसकी हत्या क्यों कर दी।
3- पीयूष, ज्योति के साथ था तो बचाने की कोशिश क्यों नहीं की।
4- पुलिस के पास पहुंचे पीयूष के कपड़े साफ-सुथरे कैसे थे।
5- पुलिस को तत्काल घटना की सूचना क्यों नहीं दी।
6- घटनास्थल पर तेज गति कार के अचानक रुकने से सड़क पर बनने वाले टायर के निशान क्यों नहीं थ।
विवेचना के बाद पुलिस ने किया था खुलासा
विवेचना के बाद पुलिस ने खुलासा किया था कि पीयूष और उसके घर के बगल में रहने वाली पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा मखीजा के बीच प्रेम संबंध थे। संबंधों में बाधक ज्योति को रास्ते से हटाने के लिए पीयूष और मनीषा ने मिलकर ज्योति की हत्या का षड्यंत्र रचा। मनीषा ने अपने ड्राइवर अवधेश से बात की तो उसने आशीष, सोनू और रेनू के जरिये ज्योति की हत्या कराने का प्लान बनाया। 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था। प्लान के तहत ही घटना को अंजाम दिया गया।
2700 पेज की केस डायरी, 45 की हुई थी गवाही
इस जघन्य हत्याकांड की विवेचना के बाद पुलिस ने कोर्ट में 109 गवाहों के आधार पर लगभग 2700 पेज की केस डायरी कोर्ट में दाखिल की थी। विवेचक के सहयोग के लिए छह सह विवेचकों की टीम भी लगाई गई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट में अभियोजन की ओर से 37, बचाव पक्ष की ओर से पांच व कोर्ट साक्षी के रूप में तीन गवाह पेश किए गए थे।