ज्योति का शव पेट्रोल छिड़कर जलाया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर खुदकुशी करनी थी तो कोई और तरीका अपना सकती थी। सुनसान जगह जाकर आग लगाकर क्यों खुदकुशी की? उधर नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वारदात पूरी तरह से हत्या की है।
ज्योति मिश्रा की मौत के मामले में पुलिस अब तक हत्या के साक्ष्य नहीं तलाश सकी है। पुलिस की जांच खुदकुशी के इर्दगिर्द ही घूम रही है। इसलिए विवेचना के दौरान केस की धारा भी पुलिस बदल सकती है। ऐसा होता है तो कई सवाल अनसुलझे रह जाएंगे।
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क्योंकि कुछ ऐसे तथ्य सामने आए थे, जो हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। चकेरी के गिरजा नगर निवासी ज्योति मिश्रा (24) टेलीकॉलर थी। 25 अक्तूबर की शाम दफ्तर से निकलने के बाद वह घर नहीं पहुंची थी। दूसरे दिन भाभा नगर में रेलवे ट्रैक किनारे शव पड़ा मिला था।
परिजनों ने ज्योति के एक परिचित अमित व उसकी महिला मित्र विमल पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने दोनों को जेल भेजा था। हालांकि करीब 20 दिन की तफ्तीश के बाद भी पुलिस हत्या के संबंध में साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। पुलिस ने शुरू में भी खुदकुशी की बात कही थी और अब उसी तथ्य पर दोबारा पहुंच रही है।
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अनसुलझे सवालों से पुलिस पर सवाल
ज्योति का शव पेट्रोल छिड़कर जलाया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर खुदकुशी करनी थी तो कोई और तरीका अपना सकती थी। सुनसान जगह जाकर आग लगाकर क्यों खुदकुशी की? उधर नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वारदात पूरी तरह से हत्या की है। इससे सवाल उठता है कि कहीं न कहीं पूरे मामले में कुछ छिपा हुआ है या छिपाया जा रहा है।