कानपुर के कल्याणपुर में स्थित राजकीय बाल गृह
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के कल्याणपुर के राजकीय बालगृह में आत्महत्या करने वालेे किशोर ने यह कदम एकाएक नहीं उठाया, बल्कि लंबे समय से वह घुटन महसूस कर रहा था। घर जाना चाहता था लेकिन राजकीय बालगृह प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई कदम ही नहीं उठाया गया।
उल्टे उसे डरा धमकाकर चुप करा दिया जाता। इन पांच महीनों के दौरान उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वह अपराधी हो और जेल में बंद हो। बालगृह प्रबंधन के लोगों और बच्चों से पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है। अभी जांच चल रही है।
असोम के लखीमपुर जिले का रहने वाला 15 वर्षीय अजीत दास मार्च में सेंट्रल स्टेशन पर लावारिस मिला था। तब से वह बालगृह में था। शुक्रवार देर रात अजीत ने फांसी लगा ली थी। बालगृह प्रशासन घटना छिपाने को झूठ पर झूठ बोलता रहा। शनिवार देर रात सीओ अजय कुमार सहित प्रशासनिक अधिकारी जांच करने पहुंचे थे।
कल्याणपुर इंस्पेक्टर ने भी पूछताछ की। इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार पांडेय ने बताया कि अभी तक की जांच में यह पता चला है कि अजीत को जबरन रोका गया था। बालगृह प्रशासन ने उसके घर वालों से संपर्क ही नहीं किया। वह खुद को कैद में समझने लगा था।
किशोरों ने उतारा था शव
घटना के दौरान बालगृह के केयरटेकर बृजेंद्र दीक्षित व दो अन्य कर्मचारी केसरी प्रसाद और अशोक मौजूद थे। पूछताछ में किशोरों ने बताया कि वे निगरानी के बजाए सो रहे थे। रात 3:12 बजे अजीत ने फांसी लगाई। 40 मिनट बाद अन्य किशोरों की नींद खुली तो उन्होंने शोर मचाया। इस पर कर्मचारी पहुंचे तो लेकिन उन्होंने हाथ नहीं लगाया। किशोरों ने खुद ही अजीत को फंदे से उतारा।
चार बार कमरे से बाहर निकला, बेचैन नजर आया
पुलिस ने घटना का सीसीटीवी फुटेज भी देखा। खुदकुशी से पहले अजीत चार बार कमरे से बाहर गया। वह बेचैन और परेशान लग रहा था। चौथी बार जब वह वापस कमरे में पहुंचा तो तुरंत चादर उठाई, उसका फंदा बनाया और लटक गया।