कानपुर। जंक फूड, कीटनाशक और ऑक्सीटोसिन के असर वाली चीजों के सेवन से एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरॉन हारमोन का संतुलन बिगड़ता है। इससे पुरुषों की स्तन ग्रंथि बढ़ जा रही है। उन्हें स्ट्रेस, एंजाइटी और अवसाद हो रहा है। हैलट के सर्जरी विभाग में साल भर में डेढ़ सौ लोग इस समस्या के आए हैं। इनमें 45 की स्तन ग्रंथि की सर्जरी हुई।
पुरुषों में स्तन ग्रंथि बढ़ने की समस्या को गायनिकोमैस्टिया कहते हैं और बढ़ी ग्रंथि को मैन बूब्स की संज्ञा दी जाती है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेम शंकर का कहना है कि हर ओपीडी में औसत चार-पांच व्यक्ति आते हैं। बहुत से भ्रमवश इसे कैंसर समझने लगते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि 35 फीसदी पुरुषों में यह दिक्कत हो रही है। दरअसल महिलाओं में एस्ट्रोजन हारमोन का लेवल अधिक होता है और पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन का। जब पुरुषों में एस्ट्रोजन बढ़ता है तो उनमें मैन बूब्स की समस्या हो जाती है। डॉ. प्रेम शंकर का कहना है कि कीटनाशक और ऑक्सीटोसिन प्रभावित चीजों का सेवन से यह दिक्कत हो रही है। कीटनाशक एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ाता है।
उन्होंने बताया कि सर्जरी विभाग में आए गायनिकोमैस्टिया के रोगियों का आयु वर्ग 17 से 28 वर्ष के बीच रहा है। कुछ में सर्जरी कर ग्रंथि निकाल दी गई। इसके अलावा रोगियों का लाइकोसक्शन पद्धति से इलाज किया गया। इसमें वसा को बाहर निकाल लिया जाता है। वहीं, मनोरोग विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. धनंजय चौधरी ने बताया कि गायनिकोमैस्टिया प्रभावित लोग स्ट्रेस और एंजाइटी की वजह से अवसाद में चले जाते हैं। उनकी काउंसलिंग करनी पड़ती है। इसे साथ ही प्लास्टिक सर्जन के पास रेफर कर दिया जाता है।