कानपुर मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की जूनियर डॉक्टर की सोमवार को बुखार की वजह से हालत बिगड़ गई। उन्हें हैलट में भर्ती कराना पड़ा। दिल्ली से आए उनके पिता ने कॉलेज प्रशासन पर अत्यधिक काम कराने और उत्पीड़न का आरोप लगाया। पुलिस भी बुला ली।
जेआर-2 मनीषा गुप्ता को कई दिन से बुखार आ रहा था। दवा खाकर ड्यूटी करने से उनकी हालत बिगड़त गई। उन्होंने दिल्ली में रहने वाले व्यवसायी पिता उमेश गुप्ता को बुलाया। सोमवार सुबह पिता जच्चा-बच्चा अस्पताल आए। उस समय डॉ. मनीषा इस विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय के कार्यालय के बगल में बने सेमिनार रूम में लेटी थी। पिता ने अस्पताल में काम के अत्यधिक दबाव से बेटी के बीमार होने और उत्पीड़न का आरोप लगाया।
डॉ. किरन पांडेय ने इन आरोपों से इनकार किया है। बताया कि जूनियर डॉक्टरों से नियमानुसार हर हफ्ते 8-8 घंटे की तीन और 12-12 घंटे की दो ड्यूटियां ली जाती हैं। डॉ. मनीषा को वायरल हुआ है। प्लेटलेट्स काउंट ठीक है। डेंगू की जांच कराई जा रही है। स्वरूप नगर थाना प्रभारी देवेंद्र दुबे ने बताया कि डॉ. मनीषा के पिता ने कोई लिखित शिकायत नहीं दी है।