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मिलेगा इंसाफ: जज ने एसीपी से पढ़वाई धारा, जबरन लगाने पर फटकारा, पुलिस कमिश्नर को दिए कार्रवाई के निर्देश

Wed, 09 Jun 2021 10:36 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट दयाराम की कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और मंगलवार को सुनवाई के दौरान एसीपी को जमकर फटकार लगाई।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में मारपीट के मामले में एसीपी स्वरूपनगर ने मनमाने तरीके से अपहरण की धारा बढ़ा दी। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट दयाराम की कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और मंगलवार को सुनवाई के दौरान एसीपी को जमकर फटकार लगाई। यही नहीं भरी अदालत में एसीपी से अपहरण की धारा का प्रावधान भी पढ़वाया।
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आखिर में कोर्ट ने आरोपी की जमानत मंजूर कर दी। उधर, कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को आदेश जारी कर एसीपी स्वरूपनगर के खिलाफ एक महीने के भीतर कार्रवाई कर अवगत कराने को कहा है। एडवोकेट प्रशांत मिश्रा ने बताया कि 26 मई को पलक सोनकर ने गुरनित सिंह के खिलाफ मारपीट, धमकी और एससीएसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी।

 
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28 मई को विवेचक एसीपी स्वरूपनगर महेंद्र सिंह देव ने मामले में अपहरण की धारा (364) बढ़ा दी। 29 को आरोपी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया। जहां से उसको जेल भेजा गया। प्रशांत के मुताबिक मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। जिसमें उन्होंने आरोपी पक्ष की तरफ से सुबूत पेश किए और दावा किया कि मामला अपहरण का है नहीं।

एसीपी ने फर्जी तरीके से धारा बढ़ा दी। सुनवाई के दौरान जब केस डायरी तलब की गई तो मामला खुला। विवेचक तलब किए गए लेकिन धाराएं बढ़ाने के संबंध में वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कोर्ट ने एसीपी महेंद्र सिंह देव से कहा कि अपहरण की धारा पढ़कर बताओ। सरकारी वकील ने कागजात दिए तब एसीपी ने धारा का प्रावधान पढ़ा।

खुद स्वीकार किया कि अपहरण की धारा नहीं बनती। कोर्ट ने माना कि न तो विवेचक ने पीड़िता के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराए और न ही धारा बढ़ाने के संबंध में कोई सबूत इकट्ठा किए। कोर्ट ने जमकर उनको फटकार लगाई। विवेचना में लापरवाही पर कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर असीम अरुण को आदेश दिया कि एसीपी महेंद्र सिंह देव के खिलाफ कार्रवाई कर एक माह में अवगत कराएं। 
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