अमर उजाला ब्यूरोकानपुर। डॉ. मुरली मनोहर जोशी की कोशिशों में आखिर कहां कमी रह गई कि कानपुर से मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फिसल गया। जबकि वह खुद स्वीकार कर चुके हैं कि केंद्र सरकार कानपुर में मेट्रो दौड़ाने के लिए खुद तत्पर थे और रहेंगे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सबकी सहमति के बाद भी मेट्रो को सैद्धांतिक सहमति के लिए रेड सिग्नल आखिर क्यों है। जबकि सांसद जोशी न अपनी पैरवी पर कई आरओबी को स्वीकृति दिलाई, सालों से अटके सीओडी पुल के कार्य को गति दी। वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है कि डॉ. जोशी जैसे कद्दावर सांसद कानपुर को मेट्रो दिलाने में आखिर क्यों ठंडे पड़े।
सांसद डॉ. जोशी बुधवार को शहर पहुंचे। वह करीब डेढ़ महीने बाहर रहे। महानगर आगमन पर उन्होंने आंधी-पानी से हुए नुकसान का जायजा लिया। यह भी कहा कि मेट्रो को लेकर सैद्धांतिक सहमति नहीं मिलने की जो बात उठाई जा रही है, कोरी बकवास है। उन्होंने कहा कि मेट्रो का जो भी काम केंद्र के माध्यम से किया जाना है, उसमें कहीं भी रुकावट नहीं आनी पाएगी।
इस बीच कानपुर से बाहर रहने के दौरान इस्टीमेट कमेटी के चेयरमैन होने की वजह से उन्होंने कई केंद्रीय मंत्रालयों का लेखा जोखा भी लिया। गंगा प्रदूषण के मसले पर जल संसाधन और गंगा मंत्रालय की अभी तक के कार्यों का भी हिसाब लिया। कानपुर में स्थापित होने वाले टूल रूम के संबंध में भी कपड़ा मंत्रालय और उद्योग मंत्रालयों के अधिकारियों से कई दौर की बैठक की। लोकसभा की कार्रवाई का भी हिस्सा बने। बताया जा रहा है कि उनके पैर में कुछ दिक्कत थी, जिसकी वजह से उन्हें हास्पिटल में भी रहना पड़ा। सांसद यहां करीब एक सप्ताह तक रहेंगे। केंद्र सरकार के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में पार्टी के कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। यहां उनका विधायक सलिल विश्नोई, सत्यदेव पचौरी, सुरेंद्र मैथानी, सुरेश अवस्थी, मणिकांत जैन, सुनील बजाज, सत्येंद्र मिश्र, दीपक, सत्येंद्र पाण्डे आदि ने स्वागत किया।