लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में घिरे 45 वर्षीय पीर अली खराब हालात से जूझते हुए जैसे-तैसे चित्रकूट स्थित अपने गांव पहुंचे लेकिन घर में दाखिल होने के अरमान पूरे नहीं हो पाए। घर से महज 50 मीटर दूरी पर अचानक कदम लड़खड़ाए और देखते ही देखते सांसों ने साथ छोड़ दिया।
घर को आर्थिक मजबूती देने के मकसद से पहाड़ी थाना क्षेत्र के बसहर गांव से पीर अली ने चार साल पहले दिल्ली का रुख किया था। दिल्ली सीमा पर आनंद विहार की एक फर्म में सिक्योरिटी गार्ड का काम मिल गया था। काम को कामयाब होता देख बेटे सोनू अली को भी वहीं बुला लिया था। उसने भी पिता की तरह गार्ड की जिम्मेदारी संभाल ली थी।
ठीक चल रही जिंदगी में पीर अली को टीबी ने घेर लिया। कुछ समय बाद लॉकडाउन ने नौकरी छीन ली। आर्थिक स्थिति खराब हुई तो 25 मई को पीर अली मथुरा में काम कर रहे दूसरे बेटे इलाही के पास निकल पड़े। टीबी के मरीज होने के बावजूद कई किलोमीटर पैदल चले। गुजारिश कर वाहनों से लिफ्ट भी ली।