ब्राजील, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों में मौत का पर्याय बने जीका वायरस ने डॉक्टरों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एलटी तीन में डॉक्टरों ने इसकी गंभीरता, लक्षण और बचाव पर मंथन किया।
प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने डॉक्टरों का आह्वान किया कि वे जीका वायरस के बारे में लोगों को बताएं और जागरूक करें। डेंगू के मच्छर एडीज के इस वायरस का वाहक होने के कारण कानपुर में खतरा अन्य जगहों से ज्यादा है।
माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल गर्ग ने कहा कि सेक्सुअली ट्रांसिमिटेड डिजीज (एसटीडी) की पुष्टि के बाद गंभीरता ज्यादा हो गई है। इंडियन काउंसिल फार मेडिकल रिसर्च ने इस पर निगरानी शुरू कर दी है। डॉ. नीना गुप्ता ने कहा कि गर्भवती महिलाओं पर इस वायरस का हमला ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है।
उन्होंने गर्भवती महिलाओं को प्रभावित देशों में न जाने की सलाह दी। इस दौरान डॉ. किरन पांडेय, डॉ. आरसी गुप्ता, डॉ. सुशील चंद्रा, डॉ. एके गुप्ता, डॉ. जलज सक्सेना, डॉ. यशवंत राव आदि मौजूद रहे।
ये हैं लक्षण
बुखार आना, जोड़ों में दर्द होना, सिर दर्द होना, आंखें लाल होना, थकान महसूस करना
ऐसे फैल रहा है जीका
जीका वायरस एडीज मच्छरों के काटने से फैल रहा है। संक्रमिक व्यक्ति को काटने के बाद कोई भी मच्छर दूसरे व्यक्ति को काटता है तो इसका खतरा ज्यादा हो जाता है।
गर्भवती महिलाओं में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसलिए इन पर इसका असर ज्यादा दिख रहा है। जीका की फिलहाल कोई दवा नहीं है। लक्षणों के आधार पर इसका इलाज हो रहा है। हालांकि भारत ने जीका का टीका बनाने का दावा किया है।