ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) एडवांस 2019 में चित्रकूट कर्वी के हिमांशु गौरव सिंह ने ऑल इंडिया सेकेंड रैंक हासिल की है। हिमांशु जेईई मेंस और आईआईटी दिल्ली जोन के टॉपर भी हैं। वह कई ओलंपियाड जीत चुके हैं। उन्होंने इसी साल गोरखपुर के एकेडमिक हाइट्स स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है।
वह केमिस्ट्री और एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड के टॉपर हैं। फिजिक्स ओलंपियाड में आठवां स्थान मिला था। रीजनल मैथ ओलंपियाड भी टॉप कर चुके हैं। दसवीं में हिमांशु ने 10 सीजीपीए हासिल किया था। हिमांशु बताते हैं कि वह आईआईटी बांबे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करेंगे। हिमांशु सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं।
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय, बताए सफलता के मंत्र
चित्रकूट पाठा के मानिकपुर तहसील क्षेत्र के देहरूच माफी गांव निवासी हिमांशु गौरव सिंह ने ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) 2019 में आल इंडिया सेकेंड रैक हासिल कर जिले का भी नाम रोशन कर दिया है। इस सफलता पर हिमांशु के परिजन व गांव के लोग खुश हैं। पिता एलके सिंह महात्मा ज्योतिबा फूले राजकीय पॉलिटेक्निक टेंवा कौंशांबी के इलेक्ट्रिनिक्स इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष हैं।
शुरु से नौकरी मिलने के कारण वह गांव से दूर हो गए। उनके दो पुत्र हिमांशू गौरव सिंह व अंशुमन सिंह हैं। दोनों शुरु से ही बाहर के जिलों में पढ़ाई कर निरंतर सफलता की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। हिमांशु का कहना है कि वह देश के सर्वोच्च इंजीनियरों के साथ काम करना चाहता है। पूर्व राष्ट्रपति डा. अब्दुल कलाम की जीवनी व अन्य नावेल पढने का उसे बेहद शौक है।
देश के सर्वोच्च इंजीनियरों के साथ काम करना है हिमांशु का सपना
किताबों से फुरसत पाने पर क्रिकेट व बैडमिंटन में भी हाथ आजमाते हैं। जिले के देहरूच माफी निवासी हिमांशु गौरव सिंह के पिता एलके सिंह का कुछ साल पहले ही उनका गोरखपुर से कौशांबी के लिए ट्रांसफर हुआ है। हिमांशु की मां रूपा सिंह ने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी केंद्रीय विद्यालय में शिक्षिका पद की नौकरी भी ज्वाइन नहीं की।
हिमांशु की इस सफलता के बाद मां का कहना कि अब लगता है कि उनका सपना पूरा हो रहा है। शुरु से हिमांशू गोरखपुर में माता पिता के साथ रहा। इस सफलता के प्रति उसे पूर्ण आभास था लेकिन अभी मंजिल नहीं मिली है। छोटे भाई को डाक्टर बनाना है और खुद देश के टॉपर इंजीनियरों की श्रेणी में शामिल होना चाहता है। इन दिनों वह मां व भाई के साथ दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहा है।
अमर उजाला से बातचीत में हिमांशु ने बताया कि उसे किताबे पढने का खासकर डा.कलाम की किताबें बेहद प्रभावित करती हैं। नावेल भी पढ़ृता है इसके बाद अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगाता है। चित्रकूट के पैतृक गांव के बारे में बताया कि ज्यादा बार तो नहीं आया लेकिन बाबा शिवभजन व दादी चुनकी देवी का प्यार कभी नहीं भूलता। गांव की मिट्टी में खेलना व घूमना अच्छा लगता है लेकिन अब इसका समय नहीं मिलता है।