चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर ने एक ही बार की सिंचाई में तैयार होने वाला गेहूं तैयार किया है। अमूमन गेहूं की फसल को पांच बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस बीज की फसल सिर्फ एक सिंचाई में तैयार हो जाएगी। इससे बुंदेलखंड समेत दूसरे ऐसे क्षेत्र जहां पानी की कमी रहती है, को फायदा मिलेगा। गेहूं के इस बीज का नाम के-1317 रखा गया है।
इसका जनक बीज तैयार कर लिया गया है। अगली रबी की फसल में इसे किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। सीएसए के बीज एवं प्रक्षेत्र विभाग के रबी बीज अनुभाग ने गेहूं का बीज तैयार किया है। बीज को विकसित करने में विभाग के विज्ञानियों को 9 साल लगे हैं।