कानपुर। जलकल विभाग को घटिया फिटकरी की आपूर्ति के मामले में नौ साल बाद न्यायालय से जीत मिली है। कामर्शियल कोर्ट ने एमएसएमई के ब्याज सहित भुगतान के आदेश को भी निरस्त कर दिया।
जलकल विभाग ने 12 साल पहले मेसर्स गौतम उद्योग को फिटकरी की आपूर्ति का ठेका दिया था। फिटकरी का उपयोग गंगा से लिए जा रहे कच्चे पानी के शोधन में होना था ताकि ट्रीटमेंट के बाद शुद्ध हुए पानी की शहर में आपूर्ति की जा सके। जलकल विभाग के अधिवक्ता यूएस आहूजा के अनुसार गौतम उद्योग ने टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया जिससे जलकल विभाग को लाखों का नुकसान हुआ। ठेकेदार के कृत्य से जनसाधारण का जीवन संकट में पड़ गया था। इसके बावजूद 2015 में एमएसएमई ने इस कंपनी को ब्याज सहित भुगतान करने के लिए जलकल विभाग को आदेश पारित कर दिया था जो एक करोड़ से अधिक धनराशि का था। उन्होंने 2017 में कामर्शियल कोर्ट में आर्बिटेशन केस दाखिल किया।
न्यायालय ने बीती 12 तारीख को जल संस्थान (अब जलकल विभाग) के पक्ष में आदेश पारित करके एमएसएमई के एवार्ड को निरस्त कर दिया। जलकल विभाग के जीएम आनंद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गौतम उद्योग को फिटकरी आपूर्ति का ठेका दिया गया था। 2018 से पहले 31,66,014 रुपये देने की बात थी जो बाद में ब्याज सहित बढ़कर एक करोड़ से ज्यादा हो गई थी। विभाग ने न्यायालय में अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अब न्यायालय का फैसला आया है।