कुठौंद थाना क्षेत्र के बिजवाहा गांव में छह वर्ष पूर्व हुई आठ वर्षीय मासूम बच्ची की हत्या के मामले में पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने पिता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
9 जून 2019 को बिजवाहा निवासी लाखन सिंह ने थाने में सूचना दी थी कि उसकी आठ वर्षीय पुत्री शाम को खेलने गई थी और फिर नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद अगले दिन बच्ची का शव गांव के ही एक खेत में झाड़ियों के बीच मिला था। उस समय उसने गांव के दो लोगों पर रंजिश के चलते बेटी की हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस को ऐसे तथ्य मिले, जिनसे मामला पूरी तरह पलट गया। जांच में सामने आया कि बच्ची की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसके पिता लाखन सिंह ने ही की थी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के छोटे भाई मान सिंह को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ में उसने बताया था कि लाखन सिंह ने अपनी पुत्री की हत्या कर शव को एक बक्से में छिपा दिया था और रात में बोरी में भरकर खेतों के पास झाड़ियों में फेंक दिया था। इसी खुलासे के बाद पुलिस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में सफल हुई।
सूत्रों के अनुसार अभियुक्त लाखन सिंह करीब एक माह पूर्व ही जेल से रिहा होकर बाहर आया था। सोमवार को पॉक्सो एक्ट कोर्ट के न्यायाधीश राजीव सिंह ने गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
देर रात तक घूमने पर दीवार में सिर मारकर की थी हत्या
ग्रामीणों ने बताया कि मासूम बच्ची मानसिक रूप से कमजोर थी, इसलिए वह घर से निकल जाती थी और देर तक खेलती रहती थी। घटना के दिन भी वह देर से घर पहुंची थी। इसी पर पिता नाराज हो गया और उसका सिर दीवार में मार दिया, इससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। आरोपी ने उसका शव बक्से में डाल दिया था, इसके बाद वह रात में झाड़ियों में फेंक आया था।