पशुबाड़े का टिन शेड बना था 'टॉर्चर सेल'
क्षेत्राधिकारी शैलेंद्र बाजपेई और कोतवाल हरिशंकर चंद को सूचना मिली थी कि गांव के ही हरिहर प्रसाद दांतरे के यहां कुछ लोगों को बंधक बनाया गया है। शनिवार रात करीब 11 बजे जब पुलिस टीम गांव पहुंची, तो पहले आरोपी ने गुमराह करने की कोशिश की। गहन तलाशी के दौरान पुलिस की नजर पशुबाड़े के पास बने एक बंद कमरे पर पड़ी। शक होने पर जब ताला खुलवाया गया, तो अंदर का दृश्य देख पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए। भीषण गर्मी और घुटन भरे कमरे में चार मजदूर कैद थे।
छह माह से साल भर तक चला शोषण
मुक्त कराए गए मजदूरों में दिल्ली के अनिल, बरेली के वीरेंद्र, हमीरपुर के प्रेमचंद्र और राठ के धर्मेंद्र शामिल हैं। पीड़ितों ने बताया कि उनसे मारपीट कर जबरन काम कराया जाता था। उन्हें भरपेट भोजन तक नहीं मिलता था और रात में मवेशियों के पास कमरे में बंद कर दिया जाता था। कई मजदूर तो करीब एक साल से इस नर्क को झेल रहे थे। मौके से पुलिस को 11 पिट्ठू बैग भी मिले हैं।
लापता युवक की तलाश में मिला सुराग
इस पूरे मामले का खुलासा माधौगढ़ के सिरसा दोगढ़ी निवासी अनमोल गुप्ता की गुमशुदगी की जांच के दौरान हुआ। परिजनों को सूचना मिली थी कि अनमोल को जगनेवा में बंधक बनाया गया है। हालांकि, सर्च ऑपरेशन के दौरान अनमोल वहां नहीं मिला, लेकिन चार अन्य जिंदगियां इस कैद से आजाद हो गईं। अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
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पिता गिरफ्तार, बेटा फरार
पुलिस ने मुख्य आरोपी हरिहर प्रसाद दांतरे को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका बेटा अवधेश मौके से भागने में सफल रहा। सीओ शैलेंद्र बाजपेई ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। फरार आरोपी की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है और मुक्त कराए गए मजदूरों को उनके परिजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।