कालपी बार संघ के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के बाद सोमवार को जिला बार संघ की आमसभा में अधिवक्ताओं ने कई अहम निर्णय लिए। बैठक में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए हत्या के लिए पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया गया। अधिवक्ताओं ने मृतक के परिवार को पांच करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। साथ ही निर्णय लिया कि दो से चार नवंबर तक कोई भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य नहीं करेगा।
आमसभा में मांग उठाई गई कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट एक्ट लागू किया जाए। गयादीन अहिरवार हत्याकांड का मुकदमा पूरा होने तक जालौन पुलिस को हटाकर दूसरे जनपद की पुलिस से सुरक्षा व्यवस्था कराई जाए। भविष्य में किसी अधिवक्ता के खिलाफ घटना होने पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में धरना दिया जाएगा। इसके अलावा अधिवक्ताओं ने निर्णय लिया कि हत्याकांड के आरोपियों की अदालत में कोई भी अधिवक्ता पैरवी नहीं करेगा।
बैठक में बताया गया कि पुलिस अधीक्षक के आदेश पर मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है। मोनू नाम का एक आरोपी अभी फरार है। एसपी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन दिन का समय मांगा है। जिला बार संघ ने चेतावनी दी कि तीन दिन के दौरान यदि कोई अधिवक्ता न्यायिक कार्य करता है तो उसके खिलाफ बार संघ की ओर से कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
हालांकि आमसभा में अधिवक्ताओं ने हत्याकांड के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए आगे की कानूनी रणनीति और ठोस कदमों पर कोई विशेष चर्चा नहीं की। बैठक में मुख्य रूप से पुलिस कार्रवाई, अधिवक्ताओं की सुरक्षा और मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांगों पर जोर रहा।