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Kanpur News: रथ पर निकलेंगे जगन्नाथ, दिखेगी पुरी की झलक

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कानपुर। भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात पुरी रथयात्रा की झलक एक बार फिर कानपुर में देखने को मिलेगी। शहर के जनरलगंज, किदवईनगर और लालबंगला सहित विभिन्न क्षेत्रों में रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 16 जुलाई को बाई जी मंदिर जनरलगंज और श्रीश्री गौरांग महाप्रभु मंदिर लालबंगला से रथयात्रा निकलेगी। 17 जुलाई को बिरजी भगत मंदिर जनरलगंज, उमा जगदीश मंदिर और श्री जगन्नाथ सेवा समिति किदवईनगर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथयात्रा निकाली जाएगी।
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जनरलगंज स्थित बिरजी भगत मंदिर की स्थापना 1753 में हुई थी। यहां स्थापित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की अष्टधातु प्रतिमाएं वर्षों से भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। मंदिर निर्माण का संकल्प दिवंगत बृजलाल ओमर ने अपने जीवन काल में लिया था। एक मूर्तिकार की ओर से तैयार किए गए अष्टधातु के विग्रहों को उन्होंने संवत 1810 में मंदिर में स्थापित कराया था। 1976-77 में दिवंगत राम कुमार ओमर (भगत जी) ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। वर्तमान में मंदिर की देखरेख ज्ञानेंद्र कुमार गुप्त और गोपाल गुप्त कर रहे हैं। परंपरा के अनुसार 11 जुलाई को एकादशी के दिन भगवान जगन्नाथ को जलाभिषेक कराया जाएगा। अधिक स्नान से भगवान के अस्वस्थ होने की मान्यता के तहत उन्हें मंदिर परिसर में सिंहासन से उतारकर विश्राम स्थल पर विराजमान कराया जाएगा। इस अवधि में भगवान को काढ़ा, पनीर और छेना का भोग अर्पित किया जाएगा। 14 जुलाई को अमावस्या के दिन भगवान के स्वस्थ होने के बाद फिर दर्शन शुरू कराए जाएंगे। इसके बाद 17 को भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे।
उमा जगदीश मंदिर से दूसरे दिन निकलती रथयात्रा

वर्ष 1954 में बिरजी भगत मंदिर से रथयात्रा पारिवारिक कारणों से बंद होने के बाद श्रद्धालुओं ने 1955 में रथयात्रा समिति का गठन किया और दूसरे दिन यात्रा निकालने की परंपरा शुरू की। 1956 में नए विग्रह बनवाए गए और 30 अक्तूबर 1961 को भगवान जगन्नाथ को भव्य शोभायात्रा के साथ उमा जगदीश मंदिर में विराजमान कराया गया। उमादेवी ने अपनी चल-अचल संपत्ति भगवान को समर्पित कर दी थी। वर्तमान में मंदिर की पूजा पं. दिनेश कुमार तिवारी करते हैं जबकि प्रबंधन जगदीश गुप्ता और सुरेश चंद्र गुप्ता संभाल रहे हैं। यहां से 17 जुलाई को रथयात्रा निकाली जाएगी।
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बाई जी मंदिर की स्थापना से जुड़ी है अनोखी मान्यता

जनरलगंज स्थित बाई जी मंदिर की स्थापना 1845 में हुई थी। मान्यता है कि राजस्थान की बाई जी पुरी से भगवान जगन्नाथ के विग्रह लेकर लौट रही थीं। कानपुर में रात्रि विश्राम के दौरान उन्हें स्वप्न में मंदिर निर्माण का संकेत मिला। अगले दिन घोड़ा-गाड़ी आगे नहीं बढ़ी तो इसे भगवान की इच्छा मानकर वहीं मंदिर बनवाकर विग्रह स्थापित कर दिए गए। यहां आज भी पुरी की परंपरा के अनुसार भगवान के अस्वस्थ होने पर काढ़ा अर्पित किया जाता है। इस मंदिर से 16 जुलाई को रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा में भगवान की मनोहारी झांकियां, पारंपरिक वाद्य यंत्र, ध्वज-पताकाएं, बैंड-बाजे और संकीर्तन मंडलियां आकर्षण रहेंगी। छोटे-छोटे बच्चे देवी-देवताओं के स्वरूप में सजकर यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे।
किदवईनगर में 24वें वर्ष का महोत्सव 16 जुलाई से

श्री जगन्नाथ सेवा समिति कानपुर दक्षिण अपने 24वें स्थापना वर्ष पर 16 और 17 जुलाई को दो दिवसीय महोत्सव आयोजित करेगी। यहां से रथयात्रा 17 जुलाई को निकाली जाएगी। समिति की स्थापना 2002 में दिवंगत पदम कुमार ओमर ने की थी। बाद में समिति की जिम्मेदारी उनके पुत्र अलंकार ओमर ने संभाली। पहला आयोजन ओंकारेश्वर महादेव मंदिर में हुआ था। इसके बाद अशोक अग्रवाल, कमल उत्तम, दिवंगत मेवालाल गुप्ता और नारायण दास गुप्ता सहित अनेक श्रद्धालुओं के सहयोग से समिति ने धार्मिक आयोजनों का विस्तार किया। समय-समय पर ओंकारेश्वर महादेव मंदिर, अंकुर धर्मशाला और वासुदेव मैरिज हॉल में भव्य महोत्सव आयोजित हुए। वर्ष 2015 से समिति नियमित रूप से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाल रही है।

लालबंगला में 18वीं बार निकलेगी रथयात्रा
दुर्गा हाउसिंग सोसाइटी स्थित श्रीश्री गौरांग महाप्रभु मंदिर से इस वर्ष 18वीं बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकलेगी। इसकी शुरुआत 2008 में दिवंगत नवीन सब्बरवाल ने की थी। उन्होंने लकड़ी का रथ तैयार कराया था जो आज भी यात्रा की विशेष पहचान है। रथयात्रा मंदिर से निकलकर लालबंगला बाजार और आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण करेगी। श्रद्धालु पुष्पवर्षा, जयघोष और भजन-कीर्तन के साथ भगवान का स्वागत करेंगे। पूरे मार्ग में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इस मंदिर से 16 जुलाई को रथयात्रा निकाली जाएगी।
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