आईएसआई एजेंट इफ्तियाज अली सिद्दीकी उर्फ इमली उर्फ बाबू की रिहाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जेल अधीक्षक वीके मिश्रा का कहना है कि इम्तियाज को छह माह बाद रिहा कर दिया जाएगा।
वहीं इम्तियाज के वकील शकील अहमद बुंदेला का कहना है कि कोर्ट ने सभी धाराओं में अलग-अलग सजा दी है। इसलिए छह माह बाद नहीं छूट सकता है। एटीएस ने इम्तियाज अली की 11 सितंबर 2009 को सचेंडी से पकड़ा था। दावा किया था कि वह आईएसआई एजेंट है।
उसके पास से कानपुर, झांसी के सैन्य प्रतिष्ठान समेत अन्य संवेदनशील स्थानों के नक्शे और दस्तावेज मिले थे। 24 मार्च को एटीएस ने लखनऊ में प्रेस नोट जारी कर इम्तियाज को 13 साल की कैद और 24 हजार रुपये जुर्माने की सजा की बात कही थी।
जेल अधीक्षक का कहना है कि इम्तियाज को धोखाधड़ी (धारा 419) में दो साल, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी (धारा 468) में चार साल, फर्जी दस्तावेज को सही के रूप में प्रयोग करने (धारा 471) में एक साल और शासकीय गोपनीय अधिनियम की धारा 3/4 में छह साल की सजा सुनाई गई थी।
इसमें जेल में बिताई गई अवधि को समायोजित करने को कहा गया है। सभी धाराओं में सजा एक साथ चलेगी। इसमें छह साल सबसे बड़ी धारा है। इम्तियाज 2009 में जेल में आया था। इस तरह यह सजा पूरी हो गई है।
24 हजार जुर्माना न देने पर छह माह की सजा उसे और भुगतनी होगी। यह सजा कोर्ट के फैसले आने की तिथि से जुड़ेगी। इसलिए छह माह बाद इम्तियाज रिहा हो जाएगा।
वहीं अधिवक्ता शकील अहमद बुंदेला का कहना है कि इस प्रकरण में यह बात लागू नहीं होती है। सीआरपीसी की धारा 31 में मजिस्ट्रेट को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाने का अधिकार है। इसलिए सजा अलग-अलग यानी कुल 13 साल होगी।