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Isha Murder: पर्स चोर के बहाने फंसाया था प्रेमजाल में, नहीं मिल पाया था सिर, मां बोली- फांसी की करेंगे अपील

Thu, 25 Sep 2025 05:55 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: ज्ञानेंद्र शहर के कई थानों में थानाध्यक्ष और एसएसआई के पद पर तैनात रह चुका है। वारदात के वक्त वह प्रतापगढ़ में तैनात था। पत्नी की हत्या के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। शादी के समय ज्ञानेंद्र मूसानगर थानाध्यक्ष था। मध्यप्रदेश के सतना के बछरावा की रहने वाली नीलम से ज्ञानेंद्र की पहली शादी हुई थी।
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ईशा और ज्ञानेंद्र - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में 10 साल पहले हुए ईशा हत्याकांड में दोषी पूर्व दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह को अपर जिला जज चतुर्थ शुचि श्रीवास्तव ने उम्रकैद और 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। ईशा की हत्या सिर धड़ से अलग करके की गई थी। पुलिस को उसका धड़ तो मिल गया था, लेकिन सिर बरामद नहीं हो सका था। सबूत के अभाव में पांच अन्य आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। ज्ञानेंद्र ने आठ जून 2015 को कोर्ट में समर्पण किया था और तब से वह जेल में ही बंद था।

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काकादेव के नवीननगर निवासी विनीता सचान की बेटी ईशा ने मूसानगर थानाध्यक्ष रहे चित्रकूट निवासी ज्ञानेंद्र सिंह से 10 मार्च 2013 को शादी की थी। इसी साल उन्हें एक बच्चा भी हो गया, लेकिन अचानक एक दिन ईशा को ज्ञानेंद्र के पहले से शादीशुदा होने की जानकारी मिली, तो दोनों में विवाद हुआ। ईशा मायके आ गई फिर वर्ष 2015 में ईशा के मामा ने अपने घर पर दोनों को बुलाकर समझौता करा दिया। 18 मई 2015 को ज्ञानेंद्र ईशा के मायके पहुंचा और मां विनीता सचान से उनकी कार लेकर ईशा को मुक्तादेवी मंदिर में दर्शन कराने की बात कहकर साथ ले गया।

महेवा घाट में मिली थी एक सिरकटी लाश
विनीता और ईशा की रात आठ बजे तक बात हुई, लेकिन इसके बाद ईशा और ज्ञानेंद्र दोनों का फोन बंद हो गया। विनीता ने काकादेव थाने में ज्ञानेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। 22 मई को काकादेव एसओ को कौशांबी के महेवा घाट में एक सिरकटी लाश मिलने की सूचना मिली। इस पर विनीता अपने बेटे ऐश्वर्य राज, भाई अजय सचान के साथ कौशांबी पहुंचीं, जहां टैटू, उंगली पर बंधी पट्टी, हाथ घड़ी व कुछ गहनों को देखकर विनीता ने शव की शिनाख्त अपनी बेटी ईशा के रूप में की थी।

ज्ञानेंद्र और ईशा की शादी की फोटो - फोटो : amar ujala
पांचों आरोपियों को पूर्व में ही कोर्ट से मिज गई थी जमानत
मुकदमे की विवेचना के बाद पुलिस ने चित्रकूट निवासी ज्ञानेंद्र सिंह, ट्रैवल एजेंसी संचालक निरालानगर निवासी मनीष कठेरिया, उसके भाई विकास उर्फ बच्चा कठेरिया, बारादेवी निवासी अर्जुन सिंह व अवंतिका, दामोदरनगर निवासी आदर्श कुमार सविता के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। एडीजीसी प्रदीप वाजपेई व वादिनी के अधिवक्ता विष्णु कुमार सिंह ने बताया कि सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने ज्ञानेंद्र को दोषी मानकर सजा सुनाई। वहीं अधिवक्ता सुधीर कुमार द्विवेदी के अनुसार कोर्ट में कोई ठोस सबूत पेश न कर पाने के चलते कोर्ट ने मनीष, बच्चा, अर्जुन, अवंतिका और आदर्श को आरोपों से बरी किया है। ज्ञानेंद्र के अलावा पांचों आरोपियों को पूर्व में ही कोर्ट से जमानत मिल गई थी।

पर्स चोर पकड़कर ईशा को प्रेमजाल में फंसाया था
मार्च 2012 में नजीराबाद में ईशा का पर्स कुछ बदमाशों ने छीन लिया था। ईशा रिपोर्ट दर्ज कराने गुमटी नंबर पांच चौकी पहुंची। वहां उसकी मुलाकात चौकी इंचार्ज ज्ञानेंद्र सिंह से हुई। पूछताछ के बहाने ईशा के घर आने-जाने लगा और कुछ दिन में चोरों को पकड़कर ईशा का मोबाइल बरामद कर लिया। ज्ञानेंद्र ने इसी के बाद ईशा से लगातार बात करके उसे अपने प्रेमजाल में फंसा लिया। इसके बाद ज्ञानेंद्र ने पहले से शादीशुदा होने की बात छिपाकर 10 मार्च 2013 को ईशा से शादी कर ली थी।

ज्ञानेंद्र और ईशा की शादी की फोटो - फोटो : amar ujala
इस आधार पर पुलिस ने बनाया था सभी को आरोपी
पुलिस ने जो कहानी कोर्ट में पेश की थी उसके अनुसार ईशा के लापता होने के बाद उसकी दोस्त अवंतिका ने ईशा के मामा को फोन करके ईशा के अपने दोस्त से दूसरी शादी कर लेने की बात कही थी। ईशा द्वारा किसी से बात न करने की भी बात कही। ज्ञानेंद्र ने भी मामा को फोन कर परेशान न होने व ईशा के लौट आने का अश्वासन दिया था। ईशा का फोन अवंतिका के पास था। अवंतिका को पुलिस ने पकड़ा तो उसने साथी अर्जुन का नाम कबूला। अर्जुन के पास से ईशा के कंगन मिले। पुलिस ने सख्ती की तो सारी वारदात का खुलासा हो गया। इस दौरान मनीष कठेरिया, बच्चा कठेरिया और आदर्श का नाम भी हत्याकांड में सामने आया। हालांकि पुलिस अपनी कहानी को सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट में साबित नहीं कर सकी। ज्ञानेंद्र की निशानदेही पर ही पुलिस ने घटनास्थल के पास से सर्जिकल ब्लेड बरामद की थी। इसी ब्लेड से ईशा की हत्या की बात कही गई थी। पुलिस को काफी खोजबीन के बावजूद ईशा का सिर नहीं मिल सका था।

शहर के कई थानों में रही ज्ञानेंद्र की तैनाती
ज्ञानेंद्र शहर के कई थानों में थानाध्यक्ष और एसएसआई के पद पर तैनात रह चुका है। वारदात के वक्त वह प्रतापगढ़ में तैनात था। पत्नी की हत्या के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। शादी के समय ज्ञानेंद्र मूसानगर थानाध्यक्ष था। मध्यप्रदेश के सतना के बछरावा की रहने वाली नीलम से ज्ञानेंद्र की पहली शादी हुई थी।

कोर्ट पहुंची ईशा की मां विनीता सचान और भाई ऐश्वर्य सचान - फोटो : amar ujala
जारी रखेंगे लड़ाई, हाईकोर्ट में करेंगे फांसी की अपील
कोर्ट का फैसला सुनने के बाद ईशा की मां विनीता और भाई ऐश्वर्य की आंखें नम हो गईं। ज्ञानेंद्र को सजा मिलने की खुशी तो थी लेकिन अन्य आरोपियों के बरी होने का मलाल भी दिखा। विनीता ने कहा कि 10 साल से इंसाफ के लिए लड़ रहीं हूं। दोषी को फांसी तक ले जाने के लिए लड़ाई जारी रखेंगी और हाईकोर्ट में अपील करेंगी।  एक मां जिसने नौ माह तक बेटी को कोख में रखा, नाजो से पाला, उसके नखरे उठाए यहां तक कि उसके पसंद के लड़के से उसकी शादी तक करने को तैयार हो गई।
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आखिरी सांस तक लड़ेंगे
शादी के बाद उसने बेटी को जन्म दिया, तो नानी की खुशी का ठिकाना नहीं था। तभी एक दिन ईशा को ज्ञानेंद्र के पहले से शादीशुदा व दो बच्चों के बाप होने का पता चला। इसी के बाद पति-पत्नी में विवाद शुरू हुआ। बाद में समझौते के नाम पर ईशा को अपने साथ ले जाकर उसकी हत्या कर दी। ईशा की डेढ़ साल की बेटी अपनी नानी के पास ही थी। कोर्ट का फैसला सुनने के लिए मां के साथ ईशा का भाई ऐश्वर्य भी पहुंचा था। भाई ने अपनी आखिरी सांस तक लड़ने की कसम खाने की बात जरूर कही।
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