रिपोर्ट में कहा गया था कि वह परिवार सहित रिश्तेदारी में एक विवाह समारोह में गई थीं। वहां से बीच में उनका बेटा किसी काम से घर आया था, तो उसने देखा कि घर पर आग लगी थी। आरोपियों ने बेटे के साथ भी मारपीट की थी और उसे आग में धकेलने की कोशिश भी की गई थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने का कोई चारा न दिखाई देने पर आखिर इरफान ने अपने भाई रिजवान के साथ पुलिस कमिश्नर के यहां समर्पण कर दिया था।
अब तक 12 आरोपियों के खिलाफ छह चार्जशीट
इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। जेल में विधायक से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री व सपा मुखिया अखिलेश यादव पहुंचे थे। इसके बाद सुरक्षा कारणों से जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर इरफान को कानपुर से महाराजगंज जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। तब से इरफान महाराजगंज जेल में ही बंद हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने अब तक 12 आरोपियों के खिलाफ छह चार्जशीट कोर्ट में पेश की हैं।
जेल से रिहा हो चुका है मोहम्मद शरीफ
पहली दो चार्जशीट में इरफान व रिजवान को आरोपी बनाया गया था, जबकि दूसरी में मोहम्मद शरीफ, शौकत अली व इसराइल आटे वाला आरोपी थे। वहीं, बाकी चार चार्जशीट अलग-अलग बाद में भेजी गई थीं। शुरुआती दोनों चार्जशीट के पांच आरोपियों के मुकदमों की सुनवाई एमपीएमएलए सेशन कोर्ट में पिछले एक मार्च को पूरी हो गई थी। इरफान महाराजगंज जेल में बंद है, जबकि रिजवान शौकत अली व इसराइल आटे वाला कानपुर जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद मोहम्मद शरीफ जेल से रिहा हो चुका है।
मोंटी के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा चल रहा है
इसी तरह आचार संहिता उल्लंघन मामले में भी फंसे इरफान सोलंकी के मुकदमे में एमपीएमएलए लोअर कोर्ट मंगलवार को फैसला सुना सकती है। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान ईदगाह के पास हैंडपंप लगवाने के मामले में भी कर्नलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें विधायक इरफान सोलंकी के अलावा सपा उपाध्यक्ष रहे बंटी सेंगर व सीसामऊ से समाजवादी युवजन सभा अध्यक्ष रहे। रोहित वर्मा उर्फ मोंटी के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा चल रहा है।