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आईपीएस सुसाइड केस: "सदा रहने को जहां में आता नहीं कोई, जैसे तुम गए मगर ऐसे जाता नहीं कोई"

Mon, 10 Sep 2018 03:13 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- एसपी सुरेंद्र की मौत पर बड़े-बड़े अफसर भी रोए
- हजारों पुलिसकर्मियों की आंखें नम, गुस्सा भी
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सुरेंद्र कुमार दास
सदा रहने को जहां में आता नहीं कोई, जैसे तुम गए मगर ऐसे जाता नहीं कोई। सीधे साधे, ईमानदार मानवीय संवेदनाओं से भरे, रिश्तो को संजो कर रखने वाले सुरेंद्र कुमार दास के लिए वह आंखें भी रोईं, जो गुस्से से भरी होने के लिए जानी जाती हैं।
 
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सुरेंद्र कुमार दास
कमिश्नर, डीएम, एसएसपी, तमाम आईपीएस, पीपीएस, पीसीएस जिनकी पहचान ही कड़क अफसरों के रूप में होती है, वे सभी पिघले से खड़े थे। भरी आंखेें, निढाल कंधे, मन में कौंधते हजारों सवाल और एक मलाल। मलाल यह कि जमीन-आसमान एक कर दिया पर सुरेंद्र को नहीं बचा पाए।
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सुरेंद्र कुमार दास
रीजेंसी अस्पताल में सुबह 10:20 बजे से माहौल गमगीन होने लगा था। सुरेंद्र की सांसें वेंटीलेटर पर उखड़ने लगी थीं। डाक्टरों ने स्थिति भांप कर आला अफसरों को सूचना दी। पहले एडीजी अविनाश चंद्र पत्नी के साथ अस्पताल पहुंचे। इसके बाद कमिश्नर, डीएम और फिर एसएसपी के बाद एक-एक कर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का वहां आना शुरू हो गया। सभी के मायूस चेहरे झुके थे, बोल नहीं फूट रहे थे। कोई किसी के कान में कुछ कहता तो कोई फोन पर बुदबुताता। हजारों सवाल, जवाब एक ही कि अब मुश्किल है।
 

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सुरेंद्र कुमार दास
एसएसपी काफी देर तक कार में ही बैठे रहे तो सीएमएस डॉ. राजेश अग्रवाल वहां पहुंचे और एसएसपी को कार से उतार कर अस्पताल के भीतर ले गए। दोपहर 12:25 बजे सीएमएस बाहर आए और सुरेंद्र के निधन की जानकारी दी।
 
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सुरेंद्र कुमार दास
इसके बाद एसएसपी, सुरेंद्र कुमार की मां, भाई व बहन को आईसीयू में ले गए, फिर चीख-पुकार मच गई। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया। सारे अफसर वहां जमे रहे। शाम करीब 4:00 बजे पोस्टमार्टम हाउस से उनका शव पुलिस लाइन ले जाया गया। करीब 5:30 बजे सुरेंद्र कुमार का पार्थिव शरीर शव वाहन से लखनऊ रवाना किया गया। 
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