पुखरायां (कानपुर देहात)। भोगनीपुर तहसील के चपरघटा में आस-पास गांवों की 1068 हेक्टेयर जमीन डेढ़ दशक पूर्व पाॅवर प्लांट लगना था। लैम्को और हिमावत कंपनी ने किसानों से जमीन खरीदी थी। साथ ही पास की कुछ ग्राम समाज की जमीन पट्टा की गई थी। किसानों की जमीन बैंक में बंधक होने पर 50 करोड़ में नीलाम कर दी गई है। मामले की जानकारी होने पर तहसील प्रशासन ने जांच शुरू की है।
चपरघटा बीहड़ में 2010 में पाॅवर प्लांट लगाए जाने के लिए सर्वे किया गया। लैम्को और हिमावत कंपनी ने सर्वे कर जिन किसानों की भूमि क्षेत्र फल में आई उनसे जमीन खरीदी ली। जमीन पर बैंक से लोन लिया गया, लेकिन यहां पॉवर प्लांट नहीं लग सका। इसके बाद से जमीन खाली पड़ी थी। कंपनी बैंक से लिए गए रुपये वापस नहीं कर सकीं। इस पर बैंक ने कंपनी द्वारा बंधक कराई गई जमीन में करीब 350 हेक्टयर जमीन को चार जनवरी 2024 में ग्रो फास्ट गोल्ड माइंस कंपनी को 49.50 लाख में नीलाम कर दिया।
बताया जा रहा है कि नीलाम की गई जमीन की कीमत 200 करोड़ से अधिक हैं। जो जमीन नीलाम की गई है वह हिमावत कंपनी द्वारा बंधक कराई गई थी, इसका विवरण खतौनी में भी दर्ज है। विभागीय जानकारों की माने तो किसी भी जमीन के अधिग्रहीत करने पर उसे पहले संबंधित नोडल विभाग को दी जानी चाहिए। मगर यहां शुरुआत से ऐसा नहीं हुआ। किसानों से ली गई जमीन भी सीधे कंपनियों के नाम कराई गई। वहीं सरकारी जमीन को भी सीधे पट्टा करा दिया गया। जमीन के नीलाम होने से लेकर पूर्व में हुई गड़बड़ी का मामला दिशा की बैठक में उठा। इसके साथ ही शासन तक शिकायत की गई। जिस पर अब पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। इसी वजह से नीलाम की गई जमीन का अभी तक दाखिल खारिज भी नहीं हो सका है। एसडीएम भोगनीपुर जितेंद्र कटियार ने बताया कि वह इस मामले की जांच कर रहे हैं। प्रकरण काफी पुराना है। जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। तभी कुछ कह पाना संभव है।
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क्या कहते ग्राम प्रधान
पॉवर प्लांट की जमीन को लेकर सिहारी प्रधान निर्मला देवी और कछगांव प्रधान अनीता देवी ने बताया कि ग्राम समाज की भूमि 30 साल के लिए लीज पर ली गई थी। जिसका एक लाख रुपये बीघा राजस्व तहसील में जमा कराया गया था। जबकि किसानों को तीन लाख रुपये बीघा दिया गया। लीज की भूमि के 15 वर्ष हो गए।
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परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी का था वादा
किसान रामकिशोर, मुन्ना, राजकुमार, राधे लाल, शिव कुमार, विजयपाल सिंह, सुरेंद्र कुमार, जयनाथ ने बताया कि पाॅवर प्लांट लगाने के लिए जमीन ली गई थी। जिसके साथ यह भी वादा किया गया था कि जिस किसान की भूमि ली जा रही है उस परिवार के एक युवक को शिक्षा के अनुसार नौकरी दी जाएगी। पावर प्लांट नहीं लगने से यह सपना चकनाचूर हो गया।