मालती देवी दासी कानपुर इस्कॉन मंदिर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संत सम्मेलन में शिरकत करने के लिए आई हैं। इस मौके पर उन्होंने बताया कि उनकी उम्र 22 साल की थीं जब वह इस्कॉन के संस्थापक श्रीला प्रभुपाद से मिली थीं। उनके विचारों की शुद्धता और सोच की ईमानदारी से प्रभावित होकर वह हरे कृष्ण चेतना अभियान में जुड़ीं। तब से वह कृष्ण चेतना के प्रचार-प्रसार में जुटी हैं। वह इस वक्त वह 73 वर्ष की हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1968 में वह अपने पति के साथ ब्रिटेन आई थीं, तभी उनकी मुलाकात बीटल बैंड के संस्थापक से हुई।
ब्रिटेन के म्युजिकल बैंड बीटल को हरे कृष्ण महामंत्र का पहला गुरु मंत्र इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉसेसनेस (इस्कॉन) की पहली महिला जनरल बॉडी कमीशन (जीबीसी) सदस्य अमेरिका की मालती देवी दासी (मैलिनी) ने दिया था। वह बीटल बैंड के संस्थापक जॉर्ज हैरिसन से ब्रिटेन में वर्ष 1968 में मिली थीं और उन्हें हरे कृष्ण महामंत्र में निहित आध्यत्मिक शक्ति के बारे में बताया। इससे प्रभावित होकर जॉर्ज हैरिसन ने एलबम निकाला। मालती देवी दास ने हैरीसन को ‘हरि’ ‘सन’ (ईश पुत्र) कहकर महामंत्र का महत्व समझने के लिए प्रेरित किया था।
महिला सशक्तीकरण के संबंध में उन्होंने कहा कि कृष्ण चेतना अभियान में पुरुष और महिला दोनों बराबर हैं। यह बात हो सकता है पुरुषों को समझने में थोड़ी देर लगे। कृष्ण भक्ति के लिए हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सब बराबर हैं। कृष्ण चेतना को समझने के लिए कोई बंधा नहीं है। कृष्ण भक्ति सभी भेद मिटा देती है। कृष्ण को जानने के लिए पहले उनके भक्त को जानना चाहिए।