कुछ दिन बाद एक लाख रुपये की और मांग करने लगे। परिजनों ने नौ अप्रैल को कर्नलगंज थाने में दोनों एजेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि दोनों आरोपी पिछले कई वर्षों से महिलाओं व युवतियों की विदेश में तस्करी कर रहे हैं। उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से वो जेल भेजे गए।
पुलिस ने बरती लापरवाही
पिछले एक डेढ़ महीने से महिला के परिजन कर्नलगंज थाने के चक्कर लगा रहे थे। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। कमिश्नरी लागू होने के बाद जब मामला अफसरों तक पहुंचा तो तुरंत केस दर्ज हुआ और आरोपी पकड़े गए। डीसीपी क्राइम ने बताया कि महिला अभी ओमान में ही है। मामले में विदेश मंत्रालय के जरिए ओमान में इंडियन एंबेसी से संपर्क किया गया है। महिला को वापस लाने की प्रक्रिया जारी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। आरोपियों से जो जानकारी मिली है उस आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। जो महिलाएं विदेश में फंसी हैं उनको वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया है।
असीम अरुण, पुलिस कमिश्नर कानपुर