अंकों में अपार ताकत है। आपको जानकारी हैरानी होगी कि अंकों का इस्तेमाल तकनीकी खामियां पकड़ने में भी किया जाता है। इसको मैथमेटिकल मैथेड और साइबर फिजिकल सिस्टम कहते हैं। इस सिस्टम से हवाई जहाज, न्यूक्लियर पावर प्लांट, कार आदि में लगे साफ्टवेयर की खामियां पता की जाती हैं। इनका सीधा जुड़ाव आम इंसान से होता है। यह कहना है यूएसए की कैरनेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रे प्लेटजर का। वह आईआईटी कानपुर में शुक्रवार से शुरू हुई 14वीं मेमोकोड (मैथेड एंड मॉडल फॉर को डिजाइन) कांफ्रेंस 2016 में आए थे।
प्रो. एंड्रे ने अपनी रिसर्च केनरा एक्स का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही मैथमेटिकल मैथेड से तकनीकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास शुरू कर दिया था। रिसर्च के दौरान उन्हें इसमें कामयाबी भी मिली और आज यह मैथेड दुनियाभर में एक बेहतर रिसर्च का केंद्र बन चुका है। तीन दिन तक चलने वाली इस कांफ्रेंस में दुनियाभर से साफ्टवेयर और हार्डवेयर के एक्सपर्ट जुटे हैं। इनमें फ्रांस आईएनआरआईए के डॉ. राबर्ट डी सिमोनी और माइक्रोसाफ्ट इंडिया के जनरल मैनेजर श्रीराम राजमणि मुख्य हैं।
भारत में पहली बार आयोजन
मेमोकोड पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस भारत में पहली बार हो रही है। इसके पहले 13 बार यह कांफ्रेंस यूरोपियन और फ्रांसीसी देशों में हुई है। कांफ्रेंस के संयोजक और कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. संदीप शुक्ला ने कहा कि आईआईटी कानपुर में कांफ्रेंस होना गर्व की बात है।