कानपुर। पिंटू सेंगर हत्याकांड में विवेचना के दौरान अधिवक्ता दीनू उपाध्याय और अरिदमन सिंह का नाम निकालने वाले तत्कालीन इंस्पेक्टर सभाजीत मिश्रा को पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने शुक्रवार को निलंबित कर दिया। आरोप है कि एफआईआर में नामजद आरोपी होने के बाद भी विवेचक ने आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए फाइनल रिपोर्ट से नाम हटा दिया था। इनके खिलाफ विभागीय जांच भी बैठा दी है। वर्तमान में सभाजीत कर्नलगंज थाने में अतिरिक्त निरीक्षक हैं।
जून 2020 में बाइक सवार बदमाशों ने पिंटू सेंगर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले में पिंटू के भाई धर्मेंद्र ने पप्पू स्मार्ट, सउद अख्तर, महफूज अख्तर, मनोज गुप्ता, दीनू उपाध्याय और अरिदमन सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में विवेचना में वीरेंद्र पाल, श्याम सुशील मिश्रा, अहसान कुरैशी, सलमान बेग, फैजल कुरैशी, साफेज हैदर, असलम कुलरेज, मकबूल उर्फ बबलू सुल्तानपुरी, तनवीर बादशाह और मोहम्मद आयाज उर्फ टायसन के नाम सामने आए थे। तत्कालीन विवेचनाधिकारी सभाजीत मिश्रा ने दीनू उपाध्याय और अरिदमन सिंह का नाम फाइनल रिपोर्ट से निकालकर शेष के खिलाफ चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत कर दी।
पुलिस कमिश्नर ने वारदात के साढ़े चार साल बाद दोबारा विवेचना शुरू कराई तो तत्कालीन विवेचनाधिकारी सभाजीत मिश्रा का खेल पकड़ लिया। साक्ष्यों के बावजूद, दीनू और अरिदमन का नाम निकालने के कारण शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर ने तत्कालीन विवेचनाधिकारी सभाजीत मिश्रा पर कार्रवाई कर जांच भी बैठा दी।