आशा ज्योति केंद्र में महिला की आत्महत्या के मामले में इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी को बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय जांच में उसका खेल खुलने के बाद जेसीपी मुख्यालय ने उसके बर्खास्तगी की कार्रवाई की है। जांच में सामने आया कि रात सवा दो बजे मां-बेटी को आशा ज्योति केंद्र में दाखिल करते समय एक प्रार्थना पत्र दिया गया था। इसमें लिखित तौर पर मां-बेटी पर केस संख्या 99 दर्ज होने का दावा किया गया था ताकि विवेचना के लिए सुबह 10 बजे तक दोनों को वहां रख लिया जाए। जांच में पता चला कि उस वक्त तक तो उस पर केस ही दर्ज नहीं हुआ था। केस रात 3:36 बजे दर्ज किया गया था।
एनआरआई सिटी के रहने वाले कारोबारी के घर से 17 अप्रैल 2022 को गहने चोरी हुए थे। तत्कालीन थाना प्रभारी आशीष द्विवेदी और चौकी प्रभारी रानू ने कारोबारी के घर पर काम करने वाली सुदामा और उसकी 13 वर्षीय बेटी को उठाया था। पुलिस दोनों को बिना रिपोर्ट दर्ज किए पहले नवाबगंज थाने और फिर देर रात आशा ज्योति केंद्र पर ले गई। यहां अगले दिन नौकरानी ने बाथरूम में फंदा लगाकर जान दे दी थी। मामले की जांच में 15 नवंबर तक आशीष को अपना जवाब दाखिल करना था। हालांकि उसने ऐसा नहीं किया।
चोरी का ट्रांसफार्मर बेचने व अखिलेश का करीबी होने का आरोप
बर्खास्त इंस्पेक्टर आशीष अक्सर सुर्खियों में रहा। कभी आशीष थाने से चोरी का ट्रांसफार्मर बेचने के मामले में तो कभी जेल में बंद अखिलेश दुबे और दीनू उपाध्याय के इशारों पर काम करने के कारण। भाजपा नेता रवि सतीजा ने आशीष और अखिलेश दुबे के रिश्तों को यह कहकर सार्वजनिक कर दिया था कि जन शिकायत प्रकोष्ठ में तैनाती के दौरान आशीष उन्हें खुद अखिलेश दुबे के कार्यालय ले गया था। वहीं, महिला की आत्महत्या के इस घटना में शामिल चौकी प्रभारी रानू रमेश चंद्र को 15 दिन में जवाब देना है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उसके खिलाफ भी बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय विनोद कुमार सिंह ने बताया कि आशीष द्विवेदी को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।