बिहार के मुजफ्फरपुर और प्रदेश के देवरिया नारी निकेतनों में देह व्यापार का खुलासा होने पर उत्तर प्रदेश सरकार की नींद खुल गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिले के अधिकारियों को आनन-फानन पत्र जारी कर बाल गृह और महिला संरक्षण गृह का व्यापक निरीक्षण करने के आदेश दे दिया। जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के पास मुख्यमंत्री का पत्र पहुंचते ही हड़कंप मच गया। हरदोई जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बेनीगंज कस्बे में संचालित स्वाधार गृह का निरीक्षण किया। यहां अभिलेखों में तो 21 महिलाओं के नाम दर्ज मिले, लेकिन मौके पर दो महिलाएं ही मिलीं। इसके अलावा भी कई कमियां मिलीं। कानपुर में एसीएम और सीओ ने महिलाओं और किशोरियों से पूछा कि लड़कों से जबरदस्ती मिलवाया तो नहीं जाता।
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संवासिनियों से पूछा, लड़कों से तो नहीं मिलवाया जाता
सोमवार को कानपुर में भी जांच-पड़ताल कराई गई। जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत ने टीम बनाकर महिला शरणालय और बालिका बालक गृह स्वरूप नगर भेजा। जांच में एसीएम और सीओ ने महिलाओं और किशोरियों से पूछा कि लड़कों से जबरदस्ती मिलवाया तो नहीं जाता है तो जवाब मिला नहीं। सिर्फ मां, पिता, भाइयों से ही मुलाकात कराई जाती है। किसी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी नहीं मिली है।
जिलाधिकारी ने जांच के लिए एसीएम 4 रिजवाना शाहिद, सीओ कलक्टरगंज श्वेता यादव और जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय को भेजा। यह टीम पहले महिला शरणालय में गई। महिला शरणालय में इस समय 70 महिलाएं और उनके 10 बच्चे हैं। एसीएम और सीओ ने पहले सामूहिक रूप से सभी से पूछा कि बाहरी लड़कों या पुरुषों से जबरन मिलवाया तो नहीं जाता है। सभी ने कहा कि नहीं। इसके बाद दोनों अफसरों ने चार-पांच महिलाओं को अलग ले जाकर कई तरह के सवाल किए। पूछा कि कोई बाहरी पुरुष तो यहां नहीं आता-जाता है। जबरन किसी के साथ तो नहीं भेजा जाता है। सभी ने कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है। इसके बाद टीम बगल में ही स्थित बालिका बालक गृह पहुंची। यहां पर 10 से लेकर 18 साल तक की 97 लड़कियां थीं। एसीएम और सीओ ने यहां भी महिला शरणालय की तरह कई सवाल पूछे। किसी ने कोई भी शिकायत नहीं की। एसीएम ने बताया कि दोनों गृहों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इससे 24 घंटे निगरानी की जाती है। दोनों गृहों में किसी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी नहीं मिली। लगातार निगरानी होती रहेगी।
चाह कर भी शिकायत नहीं कर सकतीं संवासिनी
एसीएम, सीओ, प्रोबेशन अधिकारी ने की जांच
संवासिनी गृह और बालिका बालक गृह में रहने वाली लड़कियां घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं। इन्हें कई तरह की बंदिशों के बीच रखा जाता है। यह संवासिनी न्यायिक अभिरक्षा में होती हैं। इसलिए वहां बिना कोर्ट या डीएम की अनुमति के कोई आ-जा नहीं सकता। जांच के दौरान संवासिनी गृह का स्टाफ भी सामने होता है। इसलिए कोई संवासिनी खुलकर शिकायत भी नहीं कर सकती। कहने को इनके खाने का मेन्यू तक तय है लेकिन क्या दिया जा रहा है इसका खुलासा नहीं होता।
संवासिनी गृह में ज्यादातर नाबालिग उम्र में घर से भागकर शादी करने वाली महिलाएं हैं। घर वालों के साथ न जाने पर अदालत इन्हें संवासिनी गृह भेजती हैं। अन्य तरह के मुकदमे चलने और कोई ठिकाना न होने के कारण भी कुछ महिलाओं को संवासिनी गृह में रखने का आदेश कोर्ट दे देती है। बालिका बालक गृह में घर से बिछुड़ी या मां-बाप द्वारा त्यागी गई बालिकाएं हैं। बालक बालिका गृह में 10 से 18 साल की लड़कियों और संवासिनी गृह में 18 साल से ऊपर की लड़कियों को रखा जाता है।
सुरक्षा में ही होता इलाज
यूं तो समय-समय पर महिला डॉक्टरों की टीम संवासिनियों के स्वास्थ्य की जांच करती रहती है। संवासिनियों का रुटीन हेल्थ चेकअप होता रहता है। बीमारी पर किसी संवासिनी को हैलट अस्पताल में भेजा जाता है। इलाज के लिए भेजते समय एक होम गार्ड और दो महिला कर्मचारी संवासिनी के साथ जाती है। भर्ती कराने की स्थिति में होमगार्ड की ड्यूटी लगाई जाती है। 26 लड़कियां कर रही पढ़ाई
बालिका बालक गृह की 26 लड़कियों को पढ़ाई कराई जा रही है। इन्हें स्वरूप नगर स्थित एक स्कूल में भेजा जाता है। इन्हें स्कूल ले जाने और फिर लाने की जिम्मेदारी दो होम गार्ड की है। इन्हें सुरक्षा में भेजा और लाया जाता है।
अक्सर होता रहता निरीक्षण
कई तरह की बंदिशों के बीच रखा जाता है
संवासिनी और बालक बालिका गृह का निरीक्षण अक्सर होता रहता है। जिला जज, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव, मंडलीय उप मुख्य परवीक्षा अधिकारी, कानपुर देहात के जिला जज, कानपुर देहात के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव समय-समय पर निरीक्षण करते रहते हैं। निरीक्षण की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भी भेजी जाती है। मां-बाप से ही मुलाकात
संवासिनियों की मुलाकात समय-समय पर उनके मां-पिता, भाई-बहनों से कराई जाती है। कई संवासिनियों के परिजन तो उनसे मिलने भी नहीं आते हैं। कुछ के परिजन मुलाकात करने तो आते हैं लेकिन वह लोकलाज के कारण उन्हें घर ले जाना नहीं चाहते हैं। तब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप निकला
चार जनवरी को एक मंदबुद्धि संवासिनी की मौत हो गई थी। संवासिनी के शरीर पर कई तरह की चोटों और खरोंच के निशान पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की बात कही गई थी। इससे जिला प्रशासन सकते में आ गया था। बाद में स्लाइड की जांच लखनऊ प्रयोगशाला से कराई गई थी। इसमें रेप न होने की रिपोर्ट आई थी। फरवरी में दो संवासिनियों के भाग जाने पर कोहराम मच गया था। बाद में यह संवासिनी मोतीझील में मिल गई थीं। पुरुषों का आना-जाना
बताया गया है कि बालिकाओं को कराटे की ट्रेनिंग पुरुष कोच से दिलाई जाती है। संवासिनी गृह और बालिका बालक गृह में खाद्य और अन्य तरह का सामान आपूर्ति करने वाले पुरुषों का आना-जाना रहता है। पुरुष होमगार्ड भी जरूरत पर लड़कियों और युवतियों के रहने वाले स्थान पर बेरोक-टोक आते-जाते रहते हैं।
हरदोईः महिला सुधार गृह में फर्जीवाड़ा चल रहा था
लड़कियां घुट-घुट कर जीने को मजबूर
आयशा ग्रामोद्योग संस्थान के बैनर तले हरदोई के बेनीगंज कस्बे के कृष्णानगर में संचालित हो रहे महिला स्वाधार गृह में फर्जीवाड़ा चल रहा था। जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण में फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। अमर उजाला के पास उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक जिला प्रोबेशन अधिकारी ने 26 अप्रैल को स्वाधार गृह का निरीक्षण किया था, लेकिन तब यहां 24 महिलाएं मिली थीं। इन महिलाओं ने प्रोबेशन अधिकारी को स्वाधार गृह में मशीन से सिलाई सिखाए जाने की पुष्टि की थी। हकीकत यह है कि किसी भी अधिकारी के निरीक्षण के दौरान आसपास के गांवों और कस्बे की महिलाओं को स्वाधार गृह में बुलाकर अनुदान संबंधी फाइल को ओके करा लिया जाता था।
यूं तो जनपद में कोई संवासिनी गृह या नारी निकेतन नहीं है, लेकिन निजी क्षेत्र की संस्था आयशा ग्रामोद्योग संस्थान वर्ष 2016 से महिला स्वाधार गृह का संचालन कर रही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो वर्ष 2001 में इस संस्थान ने शार्टस्टे होम की स्थापना की थी। महिला कल्याण विभाग से संचालित होने वाली विभिन्न योजनाओं के तहत यहां परित्यक्ता महिलाओं और निराश्रित महिलाओं को रखा जाता है। इन महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए जहां एक ओर सिलाई, कढ़ाई सिखाए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए वहीं परित्यक्ता महिलाओं के विवाद सुलझाकर उन्हें फिर से परिवार में वापस भेजे जाने का कार्य भी होना चाहिए। सोमवार को डीएम की छापेमारी से यह स्पष्ट हो गया है कि अभिलेखों में फर्जी संख्या और नाम दर्ज कर सरकारी अनुदान झटका जाता था। अनुदान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2016 में जब उक्त संस्था के बैनर तले स्वाधार गृह की शुरुआत हुई तो इसके संचालन के बदले में 9 नवंबर 2017 को 4 लाख 40 हजार 500 रुपए का अनुदान महिला कल्याण विभाग ने संस्था को दिया था। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुशील सिंह बताते हैं कि 26 अप्रैल को जब उन्होंने इस स्वाधार गृह का निरीक्षण किया था तो यहां 24 महिलाएं मौजूद मिली थीं। सोमवार को हुई कार्रवाई के बाद सुशील सिंह ने कहा कि संभवत: उस दिन भी संस्था के पदाधिकारियों ने आसपास के गांव की महिलाओं को बुलाकर उपस्थिति दर्ज करा दी थी। वह कहते हैं कि उनके साथ कोई महिला कर्मचारी नहीं थी, इसलिए वह स्वाधार गृह के कार्यालय में बैठकर ही निरीक्षण कर आए थे। उन्होंने बताया कि यह ब्यौरा खंगाला जा रहा है कि कब से इस संस्था को महिला कल्याण विभाग की किन-किन योजनाओं के लिए कितना अनुदान दिया गया।
कागजों पर तो स्टाफ भी भरपूर
महिला कल्याण विभाग के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक अभिलेखों में इस संस्था के पास स्टाफ भी भरपूर है। संस्था ने अभिलेखों में दावा किया है कि उन्होंने एक चिकित्सक से भी हर सप्ताह स्वाधार गृह में आकर महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए कांटे्रक्ट कर रखा है। इससे इतर छह लोगों का स्टाफ उक्त स्वाधार गृह में है। इनमें रसोइया से लेकर अधीक्षक तक शामिल हैं। यह बात और है कि जब सोमवार को डीएम ने अचानक छापा मारा तो चुनिंदा कर्मचारी भी नहीं मिले।
जांच में खुलेगा अनुदान का खेल
हरदोई के जिलाधिकारी पुलकित खरे ने उक्त संस्था को अब तक दिए गए पूरे अनुदान का ब्यौरा भी मांगा है। यह ब्यौरा सिर्फ महिला कल्याण विभाग ही नहीं अन्य ऐसे विभागों से भी मांगा गया है जो स्वयंसेवी संस्थाओं को अनुदान देते हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में अभिलेख और ब्यौरा मिलने के बाद अनुदान का बड़ा खेल सामने आएगा। अमर उजाला से हुई बातचीत में डीएम पुलकित खरे ने कहा कि अभिलेखों की जांच के बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। तब जिम्मेदारों पर कार्रवाई की पत्रावली तैयार की जाएगी।
रजिस्टर में 21, स्वाधार गृह में मिली महज दो महिलाएं
महिला शरणालय और बालिका बालक गृह गई टीम
देवरिया में सामने आए सनसनीखेज मामले के बाद सोमवार को हरदोई जिलाधिकारी पुलकित खरे ने बेनीगंज कस्बे में संचालित स्वाधार गृह का निरीक्षण किया। यहां अभिलेखों में तो 21 महिलाओं के नाम दर्ज मिले, लेकिन मौके पर दो महिलाएं ही मिलीं। इसके अलावा भी कई कमियां मिलीं। अधीक्षक के 19 महिलाओं के बारे में कुछ न बता पाने पर डीएम ने संस्था के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। अनुदान तत्काल प्रभाव से रोके जाने के लिए शासन को लिखा है।
बेनीगंज नगर के मोहल्ला कृष्णा नगर के एक मकान में आयशा ग्रामोद्योग संस्था द्वारा वर्ष 2001 से महिला स्वाधार गृह का संचालन किया जा रहा है। सोमवार को स्वाधार गृह पहुंचे डीएम पुलकित खरे ने यहां रह रही महिलाओं का ब्योरा मांगा। हड़बड़ी में मौके पर मौजूद कर्मचारी ने रजिस्टर दे दिया। इसमें 21 महिलाओं के नाम दर्ज देखकर डीएम ने सभी को बुलाने के निर्देश दिए। लेकिन सिर्फ दो महिलाएं ही आईं। डीएम ने अन्य के बारे में पूछा तो अधीक्षक आरती सही जानकारी नहीं दे सकीं। अन्य कर्मचारियों से पता चला कि सिर्फ दो महिलाएं ही यहां रह रही हैं। निरीक्षण के दौरान स्वाधार गृह में पर्याप्त बर्तन और कपड़े भी नहीं मिले। डीएम केंद्र के कई रजिस्टर साथ ले गए। उन्होंने बताया कि संस्था के खिलाफ कार्रवाई व अनुदान रोके जाने की संस्तुति की गई है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। इस मौके पर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट श्रद्धा शांडिल्यान व स्वाधार गृह काउंसलर माधुरी वैश्य व नीरू तिवारी मौजूद रहीं।