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इंडस्इंड बैंक में 4.5 करोड़ का घोटालाः आराम फरमाती रही खाकी, पोल खुली तो कही ये बातें

Fri, 23 Nov 2018 09:53 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुरः इंडस्इंड बैंक की सिविल लाइंस (कान चैंबर) में 4.5 करोड़ के गबन के मामले में दस्तावेज की जांच के बहाने पुलिस आरोपी शाखा प्रबंधक अमित शुक्ला और कैशियर राहुल तिवारी की मदद करती जान पड़ रही है। मामले में आईपीसी की धारा 409 (गबन) व 420 (धोखाधड़ी) की रिपोर्ट दर्ज है। धारा 409 में आजीवन कारावास की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए आरोपियों की फौरन गिरफ्तारी होनी चाहिए, लेकिन एफआईआर दर्ज होने के 15 दिन बाद भी आरोपी बाहर हैं।
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पहले पुलिस कह रही थी कि आरोपियों की पहचान नहीं हो पा रही है क्योंकि उनके जैसे नाम वाले कई लोग हैं। आरोपियों का एड्रेस भी सही नहीं है। अब पोल खुलने पर कह रही है कि दस्तावेज की जांच के बाद ही पकड़-धकड़ होगी। एक पुलिस अफसर के मुताबिक गबन की एफआईआर तभी दर्ज होती है, जब विभागीय जांच हो जाती है। जांच में कर्मचारियों पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं। इसके बाद ही एफआईआर दर्ज होती है। धोखाधड़ी जमानतीय अपराध है, लेकिन गबन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। करोड़ों के गबन के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है। पुलिस आरोपियों तत्काल गिरफ्तार कर गबन की रकम की बरामद कर सकती है।
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उद्योगपति नीरव मोदी की तरह आरोपी शहर या देश के बाहर नहीं भाग सकेगा। पुलिस को आरोपियों का पासपोर्ट भी निरस्त कराने की कार्रवाई फौरन करनी चाहिए, लेकिन ग्वालटोली पुलिस ने अभी तक इंडसइंड बैंक में गबन के मामले में ऐसा कुछ नहीं किया।
 

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शाखा प्रबंधक और कैशियर का पता और पिता का नाम ही पता लगा सके
मामले की विवेचना कर रहे ग्वालटोली थानाप्रभारी जय प्रकाश पाल अब तक केवल आरोपी शाखा प्रबंधक और कैशियर का पता और पिता का नाम ही पता लगा सके हैं। उनका कहना है कि मामला गबन का है। मामले से जुड़े दस्तावेज की जांच की जा रही है। बैंक के कर्मचारियों और एफआईआर दर्ज कराने वाले बैंक के रीजनल मैनेजर देबांजन से पूछताछ की जाएगी। आरोरी शाखा प्रबंधक का कंप्यूटर और लैपटॉप खंगाला जाएगा। सब साक्ष्य और सुबूत जुटाने के बाद ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। 
 
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एक्सपर्ट कमेंट
गबन के मामले में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है। विवेचक को आरोपी को तत्काल गिरफ्तारी कर गबन की रकम की रिकवरी करनी चाहिए। वरना आरोपी रकम को ठिकाने लगा देगा। वह शहर या देश के बाहर भी भाग सकता है। इसलिए पुलिस को आरोपी का पासपोर्ट भी निरस्त कराने की कार्रवाई करनी चाहिए। अगर विवेचक ऐसा नहीं करता है, तो वह एक तरह से आरोपी को मदद पहुंचा रहा है। वरिष्ठों को संज्ञान लेना चाहिए।
राजेश राय, रिटायर्ड आईपीएस 
 
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यह है मामला 
इंडस्इंड बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक देबांजन गुहा ने मंगलवार को शाखा प्रबंधक, कैशियर और हनीश रामचंदानी नाम के पेट्रोल पंप संचालक पर साठगांठ करके बैंक की करीब 4.5 करोड़ रुपये की पूंजी के गबन का आरोप लगाया। एसएसपी अनंत देव के आदेश पर ग्वालटोली थाने में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। एफआईआर के मुताबिक 10 से 25 अक्तूबर 2018 के बीच यह घोटाला हुआ। 26 अक्तूबर को बैंक का कैश चेक किया गया, तो पता चला कि खजाने से चार करोड़, 40 लाख, 40 हजार, 420 रुपये गायब हैं। यह रकम बैंक के रिकार्ड में हेरफेर करके पार की गई है।  
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