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गबन करके फरार हुआ बैंक प्रबंधक और कैशियर, मामला 4.5 करोड़ रुपये का

Thu, 15 Nov 2018 12:27 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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कानपुर में इंडसइंड बैंक की सिविल लाइंस (कान चैंबर) शाखा प्रबंधक अमित शुक्ला और कैशियर राहुल तिवारी बैंक में गबन की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से फरार हैं। ग्वालटोली पुलिस ने बुधवार को दोनों आरोपियों के घर पर दबिश दी लेकिन कोई नहीं मिला। उधर, बैंक प्रबंधन की ओर से यहां नई शाखा प्रबंधक स्वाती श्रीवास्तव की तैनाती कर दी गई है। 
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ग्वालटोली पुलिस ने शाखा प्रबंधक से बैंक में लेनदेन संबंधी दस्तावेज तलब किए हैं। पिछले कई महीने का रोजाना का डिपॉजिट, कैश होल्डिंग लिमिट, करेंसी चेस्ट भेजी गई रकम आदि की जानकारी मांगी है। इसके अलावा पुलिस ने कुछेक कर्मचारियों से भी पूछताछ की लेकिन कोई स्पष्ट बात पता नहीं चली। पुलिस के सूत्र बताते हैं कि एफआईआर में आरोपी शाखा प्रबंधक अमित शुक्ला के पिता का नाम और घर का पता नहीं दिया गया था। बुधवार को यह दोनों जानकारी हासिल की गई और पूछताछ का प्रयास किया गया लेकिन आरोपी न तो बैंक में मिले न ही घर पर। 

बढ़ सकती है गबन की राशि 
इंडसइंड बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक देवांजन गुहा ने मंगलवार को शाखा प्रबंधक, कैशियर और हनीश रामचंदानी नाम के युवक पर साठगांठ करके बैंक की करीब 4.5 करोड़ रुपये की पूंजी के गबन का आरोप लगाया। एसएसपी अनंत देव के आदेश पर ग्वालटोली थाने में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। एफआईआर के मुताबिक 10 से 25 अक्तूबर 2018 के बीच यह घोटाला हुआ। 26 अक्तूबर को बैंक का कैश चेक किया गया, तो पता चला कि खजाने से चार करोड़, 40 लाख, 40 हजार, 420 रुपये गायब हैं। यह रकम बैंक के रिकार्ड में हेरफेर करके पार की गई है। बैंक के सूत्र बताते हैं कि गबन की गई रकम बढ़ सकती है। 
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कई महीने से चल रहा था खेल ...

इंडसइंड बैंक में जनता के जमा धन को निजी इस्तेमाल में लाने का खेल कई महीने से चल रहा था। शाखा प्रबंधक जरूरतमंद लोगों को निजी तौर पर ब्याज पर रकम दे दिया करते थे। शुरुआत कम रकम से हुई थी। जब वह वापस आ गई और उसके बदले में मिली ब्याज की रकम बैंक के सिंडीकेट की जेब में पहुंची तो इसका चस्का लग गया।

बताते हैं शाखा प्रबंधक और उनके सहयोगियों की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि बैंक का करोड़ों रुपये निजी इस्तेमाल में लाने से नहीं चूके। आखिरकार वह रकम मारी गई। कई महीने तक उसे वापस हासिल करने का प्रयास चलता रहा। यह जानकारी उच्च प्रबंधन को भी हुई। जब रकम की वापसी संभव नहीं हुई तब एफआईआर कराई गई। 

यह है नियम 
इंडसइंड बैंक सिविल लाइंस शाखा में कैश रखने की लिमिट सिर्फ 25 लाख रुपये है, लेकिन शाखा प्रबंधक बीते दो महीने से रोजाना 4.5 करोड़ रुपये होल्ड कर रहे थे। दरअसल जिस शाखा की जितनी कैश होल्डिंग लिमिट होती है उतनी रकम का बीमा होता है। यानी इंडसइंड बैंक में जमा केवल 25 लाख रुपये का ही बीमा था, लेकिन रोके 4.5 करोड़ रुपये जा रहे थे। बैंकिंग नियमों के मुताबिक होल्डिंग लिमिट से अधिक रकम को उसी दिन बैंक बंद होने तक करेंसी चेस्ट पहुंचाना होता है। 
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