रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से जहां खासकर सब्जियों की पैदावार प्रभावित हो रही है, वहीं इंसानी सेहत के लिए भी जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ जैविक खेती पर जोर दे रहे हैं। जिससे दोनों तरह के जोखिम कम होंगे।
कृषि विशेषज्ञ बीएस यादव बताते हैं कि ज्यादातर सब्जियों की फसलों में मित्र कीटों के जरिये पर-परागण होता है। मधुमक्खियों व अन्य मित्र कीटों के जरिये नर परागकण फूलों तक पहुंचते हैं, जिससे फल बनते हैं।
रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से मित्रकीटों की तादात लगातार कम हो रही है, जिससे पैदावार प्रभावित होना लाजिमी है। कोलकाता विश्वविद्यालय की डॉ. प्रतिभा बसु के एक शोध में भी पर-परागण वाली फसलों के उत्पादन में लगातार गिरावट आने की पुष्टि हो चुकी है। अलबत्ता गेहूं, धान आदि ऐसी फसलों जिनमें स्व-परागण या अन्य माध्यमों से परागण होता है, उनमें यह समस्या नहीं है।
वहीं, कीटों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने और फसलों की प्रतिरोधक क्षमता घटने से भी रासायनिक कीटनाशकों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने किसानों को जैविक खेती अपनाने और एकीकृत नाशी जीव प्रबंधन पद्धतियों को अमल में लाने की सलाह दी है।
सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डा. संजीव कुमार का कहना है कि कीटनाशक युक्त अनाज, फल और सब्जियां सेहत के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कीटनाशक श्वांस, मल या मूत्र के जरिये विसर्जित नहीं होते, बल्कि शरीर में फैलकर चर्मरोग, अस्थमा, पार्किंसंस, डिमेशिया, अल्सर, कैंसर जैसी बीमारियों का कारक बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि बड़े बर्तन में चार गिलास पानी और एक गिलास सिरका मिलाकर उसमें फल-सब्जियों को एक घंटे डुबोने के बाद ही इस्तेमाल करें। वहीं ठंडे पानी से तीन-चार बार धोना भी बचाव का सुरक्षित तरीका हो सकता है।