मेक इन इंडिया तकनीक पर बने फायर सेफ्टी सूट बहुमंजिला इमारत, कारखाने, औद्योगिक इकाइयां और रिफाइनरी में भयानक आग लगने पर जान बचाने में मददगार साबित हो सकेंगे। यह विदेशी सूट के मुकाबले सस्ते और आग के उच्च तापमान को रोकने वाले हैं। इसे उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (यूपीटीटीआई), आईआईटी कानपुर, बीएचयू और रुड़की के सहयोग से मथुरा के स्टार्टअप सिक्योरफायर इनोवेशन फायर प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है। कंपनी ने करीब 1500 डिग्री सेल्सियस के तापमान में 190 सेकेंड तक बचाव करने का दावा किया है। सूट में सेंसरयुक्त अलार्म लगा हुआ है।
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कंपनी ने दमकल कर्मियों के लिए स्वदेशी फायर एंट्री सूट, आंखों की सुरक्षा के लिए एफएसएच विजर, अग्न्यांतक नामक के दस्ताने और शूज कवर विकसित किए हैं। अग्निशमन विभाग से बातचीत चल रही है। स्टार्टअप के संस्थापक प्रेमेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों और रिफाइनरी में आग लगने पर तापमान 2000 डिग्री सेल्सियस (84 हीट फ्लक्स) तक चला जाता है। अब तक आ रहे विदेशी सूट अधिकतम 150 सेकेंड तक सुरक्षा प्रदान करते हैं। सूट के भीतर का तापमान 57 डिग्री तक बढ़ जाता है।
अधिक तापमान होने पर कुछ ही समय बाद आंखों की दृश्यता प्रभावित हो जाती है। दस्तानों और जूतों में गर्मी पहुंचने जैसी समस्या आती है। सिक्योरफायर की नई स्वदेशी टीआईएफआई फायर एंट्री की ईएचएफ सीरीज ने वैश्विक रिकार्ड को तोड़ दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा तैयार सूट 190 सेकेंड तक दमकल कर्मी को सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अंदर का तापमान 52 डिग्री तक बना रहता है। अधिक तापमान होने पर अलार्म के माध्यम से सचेत करता है।
पांच मिनट तक नहीं जलेंगी आंखें
प्रेमेंद्र ने बताया कि फायर सूट में अक्सर 130 डिग्री सेल्सियस होते ही आंखों के सामने धुंधला होने लगता है। फायर सेफ्टी हेलमेट (एफएसएच) विजर को भी उच्च तापमान में दृश्यता बनाए रखने के लिए विकसित किया गया है। इसका परीक्षण 1420 डिग्री तापमान में पांच मिनट से अधिक समय तक किया गया है।
500 डिग्री की कॉन्टैक्ट हीट से हाथों की सुरक्षा
कंपनी के अनुसार डीएसआईआर की प्रिज्म योजना के तहत विकसित टीआईएफआई कंपोजिट तकनीक से बने दस्ताने 500 डिग्री सेल्सियस की कॉन्टैक्ट हीट में 38 सेकेंड से अधिक सुरक्षा देने में सक्षम हैं। पेटेंटेड सामग्री से बने शू-कवर गर्म और सुलगते मलबे पर चलने में मदद करते हैं। बामूरा सूट जहां सात किलो का है और मेटारा सूट पांच किलो का है।
डीआरडीओ पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं प्रेमेंद्र
स्टार्टअप के संस्थापक को रक्षा मंत्रालय की ‘डेयर टू ड्रीम 2.0’ राष्ट्रीय चुनौती में विजेता चुना जा चुका है। उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से डीआरडीओ राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बेलारूस सरकार ने तकनीक को अपनाने और वहां की दो सरकारी होल्डिंग कंपनियों के साथ विनिर्माण व तकनीकी सहयोग में रुचि दिखाई है।